चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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श्वेत) । फैंचा—कञ्च लखमोंदरी नामक पक्षी जो बत्तख और मुर्ग़ीके
बीचकी जातिकी होती है । कंचिपच—टोकरियों भर, असंख्य ।
(२) उसरहकोया—इसे उसरहगेदा भी कहते हैं । यह भूरे रंगकी होती है
और अक्सर दो-तीन सौके झुण्डमें एक साथ पायी जाती है ।
(३) परवा—कबूतर । रटोटा—रटोळकर ।
(४) बनकुकुरा—बनकुक्कुट, बनमुर्गी । फेरमोरो—चरख चरत सोहन
यह मोरके समान किन्तु उससे छोटा होता है । कैंज—कुञ्ज,
क्रौंच कुरंग ।
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( रौदैन्ट्स ११३ )
सिफ़ते पुजानीदने ताआम दर मतबख़
( भोजन बनानेका वर्णन )
तीन भाग सैं बैठ सुपारा । घीठर आन रसोई परजारा ॥१
मास मसोरा कटवाँ कीन्हाँ । लै घँगार पतियों कर दीन्हौँ ॥२
बेगर बेगर पखि पकाई । घिरत बघार मिरष भराई ॥३
मिरचन अँबिरचन बनबा वय । रस रसनाकर सेंधो गेरा ॥४
कूँकूँ मेलि कियो धमथारू । दराँद कराँद अँबिली घारू ॥५
फनक तराफत खसोर, लोन तेल बिसवार । ६
खटरस होइ महारस, तिलकुर कियउ अहार ॥७
टिप्पणी—(१) सुपारा—सूपकार, रसोइया । आन—आकर । परजारा—(सं
प्रज्वलन > प्रा पज्जलय पज्जेल > पज्जर > परजरना) प्रज्वलित किया
जलाया ।
(२) मसोरा—कचार, पीसकर बनाया हुआ । कटवाँ—काटकर बनाये
हुए । घँगार—शाकन बघार ।
(३) बेगर बेगर—तरह तरहके; भिन्न-भिन्न प्रकार के । बघार—छारा ।
(४) सेंधा—सैन्धव सेंधा नमक ।
(५) कूँकूँ—केसर । मेलि—मिलाकर । धमथारू—छौंकक मसालेस
छौंका ।