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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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(रौरेण्ड्स ११४)
नियत राजिआछे हर जिन्सो गोपद
(तरकारीका वर्णन)
घाघर पापर मूँज उघाये । भाँगा टेंडस सोंधि तराये ॥१
फरुयें तल करेला तरे । कुम्हड़ा मूँज साथ एक घरे ॥२
खखसा परवर कुँदरं अही । घी तुरई अरुई कही ॥३
घाटी नोट धोइ पफाइ । चूका पालक आँ चौलाई ॥४
लोंआ चिचिंढा पहु छोरइ । सेंसा सेंध मार दस भइ ॥५
गंगल चुबैं सौफ आँ, माड मेथि पक़ान ।६
रांधे कुसुम कैंडुरियाँ, काड़े फल सन्धान ॥७
टिप्पणी—(१) पापर—बाबर पाठ भी सम्भव है। बाबर चावलके आटेकी मालपुएके
सदृशी मिठाई है। अलीगढ़ क्षेत्रमे यह बाबरा या बाबरीके नामसे
प्रसिद्ध है। भूननेके प्रसङ्गसे पापर (सं पर्पट > प्रा पप्पड > पापड

पापर) पाठ ही सङ्गत है। सुनीतिकुमार चाटुर्ज्याके अनुसार पापड
शब्दके मूलम तमिल शब्द पर्पु (दाल) है। यह आजकल उर्द या
मूँगकी दाल चावल साबूदाना आदिको पीसकर मसाला मिलाकर
बनाया जाता है और भून अथवा तलकर खाया जाता है।
भाँगा—भटा बैगन। यह प्रायः साल भर होने वाली तरकारी है।
भारतकी प्राचीन तरकारियोंमे इसकी गणनाकी जा सकती है। बाणने
हर्षचरितमें 'श्वेत 'वंगार' नामसे उल्लेख किया है।
टेंडस—टेंड़स, टिण्डा।
(२) करेला—यह काफी प्रसिद्ध तरकारी है। कड़वी होनेके कारण प्राय
इसकी तरकारी सरसोंके तेलमें तलकर बनायी जाती है। कडूँवे तेल—
कटु तैल सरसोंका तैल। कुम्हड़ा—संस्कृत गणपक्व वार्ताराक,
तौताफल कहुवा कुष्माण्ड। इसकी बेल होती है और यह गर्मी
और बरसातमें होती है। आकारमें यह तरबूजकी तरह और रंगमें
पीला होता है। पका हुआ कुम्हड़ा बहुत दिनों तक खराब
नहीं होता।
(३) खखसा—करेलेकी जातिकी छोटे आकारकी तरकारी। इसे हाँडीपे