चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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साठज दीस न अबरा, अनैं सै घर जाइ ॥६
जवैंत पंखि सैंकोले, कही (बिरंत) सब गाइ ॥७
मूलपाठ--(५) बरारे । (७) भरत (मुकठोंके अभावमें यह पाठ है) ।
टिप्पणी-(१) रोझ (सं रुष्य>प्रा रोक्ख)—नीलगाय । चीतर—चीत्तल एक
प्रकारका मृग । झाँख—साँभर ।
(३) गौज—एक प्रकारका बारहसिंहा जिसे गौंद भी कहते हैं। पुकारी—
मोर । ओखरा (लोखहा)—लोमड़ी (लोमड़ी खाद्य है यह संदिग्ध
है) । ससा—शशक खरगोश । डॅवकन्ना (लम्बकर्ण)—लम्बे कान
वाला खरगोश । खर—लोम्बा शूकर पूरा सूरा ।
(५) साउज—(स स्वापद्>साउअअ>साउज)—जंगली जानवर।
बनझुक (बनैक)—जंगली । यहाँ सूअरसे अभिप्राय है ।
(६) दीस—दिखाई पड़ा । अबरा—सुकर । अनै—अनेक ।
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(अप्राप्य)
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(रौकैनुस्स ३१२)
विपते ब्यनबराअ दर प्वाखते महर
(पक्षियोंका वर्णन)
भटर तीतर लावा घरे । गुडरू फैंबों खचियन भरे ॥१
बहुरु बिगुरिया औ बिरयारा । उसर सकोवा औ मनबारा ॥२
: परबा सेतकार बलोरा । रैन टिटहरी घरे टटोरा ॥३
बनकुकुरा केरमोरो घने । कुँज महोख साँय न गिने ॥४
घरे कोयरें अँगहसी घनों । पंखि बहुरु नाँउँ को गिनौं ॥५
जे कय माप समान, सरभस बरन के तेहि ।६
अउर पंखि जे मारे, ताकर नाँउँ को लेहि ॥७
टिप्पणी-(१) लावा—(ल्वा) बटेरसे छोटा इसी जातिका पक्षी (बटन क्वेल) ।
गुडरू—बटेर जातिका इसी नामसे ख्यात पक्षी (कामन बस्टर्ड