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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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( रीलेनहूल १ ९ )
कबूल कर्दने महर सुखुने चाँदा ब इस्तेदाब दादने इसे बस्क रा
( चाँदाके अनुरोधपर ज्योनारका आयोजन )
चाँद बचन हौं फहवाँ पावउँ । सब गोवर औ देस जिंवाषठँ ॥१
महरैं नाउहिं कहा बुलाई । घर घर गोवर नोवहु जाई ॥२
काल्हि महर घरँ बेंधनारा । थार झाइ सब झार हँकारा ॥३
सुनिकै नाउ दसा दिसि गये । तैंतीसों पार सब नोता लिये ॥४
खोंट खोंट सब नोता झारी । अथवाँ सुरुज परी अँधियारी ॥५
पारध पठये अहेरे, औ बारी पनवार ।६
पछिले रात आये बहुरि, नाउ सहदेव (दुआर) ॥७
मूलपाठ—(७) महर ।
टिप्पणी—(३) झार—एक एक करके ।
(४) दशा—(बारही) दस । पार—पांत; पंक्ति समूह यहाँ जातिसे
तात्पर्य है ।
(६) पारध—शिकारी । पठये—भेजा । बारी—पत्तल बनानेवाली जाति ।
पनवार—पत्तल ।
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( रीकैण्ड्स ११ )
आवर्दने सैय्यादाने हैवानाते हर किस्मौ
( अहरियोंका अहेर लेकर आना )
दिन भा पारघ आइ तुलाने । अगनित मिरग जियत घर आने ॥१
बहुतैं राझ गेंड़ना न गिने । तीतर झाँउ औहि न गिने ॥२
गाँन पुछारि औ लोरउरा । ममा लैंप्रस्नों घर एक [सँकरा*] ॥३
मेढ़ा सहस मार के टाँगे । थार पाँच मै बकरा माँगे ॥४
औ माउव मह पनइल मार । सैंपर पार का फई न (पारे) ॥५