सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 193, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 193

१५४
कहु सो पात जिहँ सँअस मई । काइ लाग भर कँगर गई ॥३
चाँद बिरस्पत कै पाँ परी । कान्हि सुरुज देखउँ एक घरी ॥४
कै यह मोरें घरैं बुलाबहु । कै मैं ले बोकै (ढिंग) लावहु ॥५
चाँद गुनित मैं देखी, सुरुज मंदिर जिहँ आठ ।६
कर महर सँठ बिनती, गोवर नोत खिवाँठ ॥७
मूलपाठ—(५) इन्द । गाफका मस्कूफ़ छूट जानेसे यह पाठ है ।
टिप्पणी—(३) घरी—घड़ी । ४५ मिनटकी एक घड़ी होती है ।
(४) कान्हि—कब ।
(५) कै—या तो । बोकै—उसके ।
१५०
(रीडैन्ट्स १८)
रफ़्तने चाँदा बर महर व अर्ज शाश्त मेहनानिये कमर करदन
(चाँदके महरसे बन-भोज करनेका अनुरोध करना)
बिरस्पत बचन चाँद चित धरा । हींडर पूरि खाँड पिठ भरा ॥१
सुनतैं बचन महर पहँ गयी । आइ ठाढ़ि आगैं होइ भयी ॥२
एक ईछ इछी मैं पीता । दोतुम्ह राठ रूपचन्द बीता ॥३
दंवहिं पूजा फूल चढ़ाऊँ । पायँ लाग कर काइ मनाऊँ ॥४
पिता मोर भो रन बित आइह । दस लोग सम नोत खिवाइह ॥५
पर यह बाष जो कीन्हेउँ, अरज हाथ सा नारि ।६
राइ राइग रन जीत, आयहु कटक मँघारि ॥७
टिप्पणी—(१) हींडा—हृदय ।
(२) ठाढ़ि—खड़ी ।
(३) ईछ—इच्छा । ईछी—इच्छा किया संकल्प किया ।
(४) आइह—आवेगा । खिवांइह—भोजन करावेगा ।
(६) बाष—बचन ।