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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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( रीकेन्स ९९ )
जम कंदने लोरक बा राव व हज़ीमत खुर्दने राव
( लोरक और रावका युद्ध : रावकी हार )
पठटा लोर संग जस गावा । फल खाँड राजा सर बाजा ॥१
खड्ग तार लोरक कै भाजी । पाखर काट राठ गा भाज़ी ॥२
पिवली जोनें भरसि महराजू । मारसि सिरिछन्द औ सुरैराजू ॥३
धीरगझ मारसि औ फिरे । बंबर आग खाँडे परवरे ॥४
मार सकति लै रफ़त बहाये । खड्ग झार लोहें भुझाये ॥५
आगें दइ लिहसि दर आपुन, हाथ चला धस टाँड ।६
लौटा बाँठ लोर [ ], सबन उझारस खाँड ॥८
टिप्पणी-(५) सकति (सं शक्ति)—तीन नोकोंवाला त्रिशूलके ढंगका छोटा बाण।
१४१
( रीकेन्स १ )
उफ्तादने बाँठ बर मैदान व हज़ीमत खुर्दने राव रूपचन्द
बाँठका गिरना : राव रूपचन्दका पराजय
उमर बाँठ लोरक धस मारा । परा धोर नर दबी उधारा ॥१
दूसर खाँड जा पैठ सनाहाँ । भुँजीं टूटि उपरि गइ पाहाँ ॥२
उठा छोर सकति कर गहे । मारसि बेरुझ पाखर रहे ॥३
उमर धीर दोउ बरबण्डा । अगिन भरै बर पावत खण्डा ॥४
गरद सेंजोइ बाँठ खसि परा । हियें पाठ दइ लोरक धरा ॥५
धरसि तार तरवारि कण्ठहुत, काट पसा लै मुण्ड ।६
माजि चला बर राठ रूपचंद, दंख पड़ा भइ रुण्ड ॥७
टिप्पणी-(४) बरबण्डा (वरिवण्ड)—बलवान प्रचण्ड दुर्धर्ष।