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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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( रौलेण्ड्स ११ )
दुमान बदन जरक अस कन्दरे सब रूपवन्द
( मारका स्वरूपमुखी सेनाका पीछा करना )
तोरुक कहा जान जनि पावहिं । सम मारों जम फिर न आवहिं ॥१
मार्गहि पायँक कीचहँ भर । ग्यँह रक्त पूइ भरे ॥२
मार महावत हाथी घर । धीर न टाढ़ घोड़ पागरे ॥३
बहुतै लोग जियत घर आवें । बहुतै जीउ लँ निसर पराने ॥४
मारत गरग मूँठ अस लागी । परी माँझ राजा गा भागी ॥५
मरिहें न गुर्झ धरता, रक्त भयउ पंराउ ।६
घला गँवाइ राउ दर आपुन, बहुरि न आवइ काउ ॥७
टिप्पणी—(१) असि—सज न ।
१४३
( रौलेण्ड्स ४० ; पंजाब [क] )
सिर । चाउकन उचार नाव
( मुराँ नावका जीव )
गीर्बाह नाना फत्रन हँकारा । फीत समाइ अगिन¹ परजारा ॥१
आब पोर इत गँट तारा । नार समायें कुरुउँ जउतारा ॥२
नाना काठ दग कर आरा । बाँन्द क दर मोटा छारा ॥३
भरग उड़त गरुड़ह र्गानी । खान बगार माँझ दम कीनी ॥४
गुनों मिपार पिंगमुग आरा । ग्न पाय मय जान पुकारा ॥५
पहू माँझ धर गाएव, रक्त भयव ल पुष्ट ।६
भाव भीम परि जँरत, मात मोंम मरि मूष्ण" ।७