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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 186

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(रीडिंग्स ९७)
मुशावरत कर्दने राव रूपचन्द बा बाँठा
(राव रूपचन्दका बाँठासे परामर्श)
राइ कहा बाँठा कस कीजइ । सब दर खोप नगर किन लीजइ ॥१
ओ तिहँ राइ आपुन पँछवाइ । चाँद सनेह झूस पुनि पाई ॥२
पहिरै खाँड अनै तस जोरी । देखहिं देख बतीसो कोरी ॥३
पेखहिं पेखहिं मयठ अमेरा । चला भाजि राजा फर फेरा ॥४
चाँदा कारन जूस पुनि पायी । औ तिहँ रकतहँ मयठ बिगचा ॥५
लै वो पखरिया समता महँ, गाँठह कस कीज ।६
फै चाँदा लै जाइ राजा, फ गोबरौँ खिउ दीज ॥७
टिप्पणी—(२) दूसरी पंक्तिका उत्तर पद और पाँचवी पंक्तिका पूर्वपद लगभग
एक-सा है ।
(५) प्रतीक अनुसार पाठ ठीक होते हुए भी पूरी पंक्तिके शुद्ध पाठ होनम
सन्देह है ।
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(रीडिंग्स ९८)
जवाब दादन बांठा बर राव रूपचन्द रा
(बांठाका उत्तर)
राइ पखरिया माँ पहिं देहु । अदमी तीन चार तुम्ह लेहु ॥१
लै अभरौं हा राउत वहौं । पाछ मोर न छोड़हिं तहौँ ॥२
परा महर असि परी मढानी । बाँठ पिनवै तिहँ फे आनी ॥३
दुरि लै बाँठा तिहँ सुइँ गयउ । जहाँ अमेर महर सों अभयउ ॥४
[L25: दूध पियावत फिरैं हि न कोई । अब कँ मर्यै काल कित होई ॥५
परे पखरिया नौ दस, मल पानै होइ फाग ।६
महर सनाह टूटि गा, आछ गाँठ घर लाग ॥७