चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४९
पहिलहिं अजयी दोख अनावाँ । मिस कै बरफा दाँत कँपावा ॥३
घात काट कहसि केर ओ फेरी । घिरै लै गोड़ी तर घेरी ॥४
अग मूँह अस करे पुकारा । कौन मीचु दीन्हें कन्तारा ॥५
लाज लाग महरैं मुँह, अमहीं राउ कह आठ ।६
खाँड मीचु बनायउँ, दइ भल पछतात ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—राजी शुदने लेकिन व इजाजत दादने मैना, विरभ कर्दने
लोरक बतानये राब रफतन (मोकिन का राजी होना मैना का अनुमति
देना और लोरक का राव के यहाँ जाना)
१—रइ । २—अजयी । ३—अपावा । ४—अमवइ ।
टिप्पणी—(२) अजयी—लोक-कथाओं के अनुसार अजयी लोरक का गुरु था । यहाँ
उसके सम्बन्ध में स्पष्ट कुछ नहीं कहा गया है, परन्तु प्रसंग से लोक-कथाओं
की बात ठीक जान पड़ती है ।
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( रीसण्ड्स ८९; बम्बई ८ )
नमून्दने लोरक रा अजयी तरीकए जंग
(अजयी का युद्ध कौशल बताना)
अजयी कर बरकै असलाओँ । यहँ बहुत तुम्ह हुत' सिधि पाऔँ ॥१
में लोरक सहियों सिधि दीन्हेँ । हाथ भिरेँ तुम्ह नहियाँ लीन्हेँ ॥२
अब पुषि देतौं सुनहु दूँ मोरी । ओडन देह न देखें चोरी ॥३
फिरें रोग सुरैं पाठ उठावहु । भाँइ तुकाइ खड्ग चमकयहु ॥४
पात गहत जिन भूलै दीठी । पाउ न देसँ अखरहिं पीठी ॥५
खाल उघारैं खदहुँ, सीस भरे जिउ जाइ ।६
खड़ग भरहरे मारहु, अइसें पन्ह अरराइ ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति ।
शीर्षक—विदआ करने लोरक बर अजयी रा ब हुनरहाय जंग आमोखने
अजयी बर लोरक रा (लोरक का अजयी से विदा माँगना और अजयी का
उसका युद्ध कौशल बताना)