सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 179, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 179

९५

१—पकरहिं मलगकतैं । २—छेदैं । ३—पावठैं । ४—रते । ५—बैठे ।
६—सुनहु तुम । ७—पाट परै । ८—डगायहु । —धस्कावहु ।
९ —उभारत रोवहि । ११—बइ मयाहर ।
टिप्पणी—(२) तदिया—उस दिन । जदिया—जिस दिन ।
(३) ओडम—डाल ।
(६) संदेशु—संदेशो ।
(७) अराव—पेड़के गिरनेकी क्रिया ।
१२६
( रफ्तींग्स ०१ )
रफ़्तने लौरक बर महर ब बग दहानीदने महर लोरक रा
( लोरकका महरके पास आना । महरका लोरकको पान देना )
पहिले जाइ महर (अरगायहु)¹ । तौ पाछै तुम्ह इसँ जाबहु ॥१
लोरक जाइ महर अरगावा । पेग बीस चल आगैं आवा ॥२
अवनिहि लोरहिं भये परजाई । सगरैं होइ मैं देखेतैं आई ॥३
लोरक सूर बिहसि तूँ मारा । मार पीठ मुख देखउँ तोरा ॥४
हौं तुम्ह यें धीर जो पाऊँ । आधे गोवर राज फराऊँ ॥५
तीन पान कर बीरा, महरैं लोरहि दीन्हि हँकार ।६
घोर देउँ सो आउर पाखर, जो आयहु रन मार ॥७
मूलपाठ—१—अरगावा ।
टिप्पणी—(१) तौ—उसके ।
(३) तइस—उसके अनुसार ।
१२७
( रफ्तींग्स ०२ )
रवाँ कर्दने लोरक बा याराने खुद दर मिदानजंग
( लोरकका अपने साथियोके साथ युद्धके मैदानमे जाना )
चला खाग ले आपुन साथी । अइबाँ पखरे मँमंत हाथी ॥१
लोहू नदी जनु दह पुचकाइ । तारूँ तरणों सै जनबाइ ॥२