सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 145, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 145

१२६
टिप्पणी—(२) इहवाँ—यहाँ । रचाबसु—राज्यादेश । आऔं—ले आऊँ ।
(३) हेर टोह—ढूँढ़-खोज कर ।
(७) पिवहार—गीतकार, गायक ।
७३
( रीडिंग्स ४ )
हिकायते दीदने चाँदा बयान करदन पेश राव रूपचन्द
(राव रूपचन्दके सम्मुख चाँदाके दर्शनका उल्लेख)
सुपन क सुनाँ कहउँ हौं काहा । बोलेउँ सोइ जो देखेउँ आहा ॥१
नगर उजैन मोर अस्मानू । विकराजित राजा घरमानू ॥२
चारिउँ भुवन फिरत हौं आवा । गोवर देखेउँ नगर सुहावा ॥३
विहवाँ चाँद तिरि मैं देखी । पायर खीर अहस चित पैठी ॥४
मनहुत अइसहिं मेट न जाई । दिन-दिन होइ अधिक सवाई ॥५
सहदेव महर कर धिय चाँदा, चहुँ भुवन उजियार ।६
मानिक जोत आन बर जरैहि, नागर चतुर अपार ॥७
७४
(रीडिंग्स ४१ ; बम्बई ६)
आशिक शुदने राव बर नामे चाँदा व अस्म बखशीदन बासिर रा
(चाँदाका नाम सुनकर रावका आसक्त होना और बासिरको
घोड़ा देना)
सुन कै चाँद राउ अँगरानाँ । बासिर उभत' नीर ढर आनाँ ॥१
जसको सूत बैठि' उठि बागी । राजा हियँ घटपटी लागी ॥२
जुरी दइ बाजिर कहुँ आनी' । पीठ घाल पाखर सनबानी' ॥३
बासिर कौन देस सो नारी । ठौर कहहु बरु तुमहि बिचारी' ॥४
करन कहत भौ लखन बिसेखी । अछरं रूप सो तिरिया देखी ॥५
मारग कौन फैस बैठारा, साँध छोट कस आह ।६
सहज सिंगार भोग रस, पिंडक, पराक्रम कै चाहि' ॥७