चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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(६) इहँ—ठौर, जगह ।
(७) सँभार-सँभार—स्मरण कर करके ।
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( रीडैन्ट्स ३८ )
रसीदन बाज़िर दर शहर व सुरुद कर्दने बाज़िर अन्दर शब व शुनीदने
शब बज बाम
( बाज़िरका एक नगरमें जाकर रातको गाना और छतपरसे
राजाका सुनना )
एक खूँड छाड़ आन खूँड जाई । माँस एक बाज़िर पाट घटाई ॥१
पुनि ओ आइ मयठ पैसारा । पैठि पौंरिया नगर दुआरा ॥२
बात भूझ सब लेतस नाऊँ । भीख माँग खाओं इँह गाँऊँ ॥३
राइ रूपचंद भाँठ सरेखा । नगर राज फिर बाज़िर देखा ॥४
दिवस गयो निसि मयठ उझेरा । बाज़िर फिर कर लेस बसेरा ॥५
तिहँ रात सुहावन, बाज़िर ठोका तार ।६
गाइ गीत चंद्रावल, नगर मयठ झनकार ॥७
टिप्पणी—खूँड—खण्ड देश-विभाग ।
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( रीडैन्ट्स ३९ )
दर रोज तलबक्रीदन शब बाज़िर रा व पुरसीदन कैफियते सुरुदे शब
( दूसरे दिन राजाका बाज़िरको बुलवाकर गानेका कारण पूछना )
दिन भा रावँ भाँठ भुलावा । आज रात निसईं कँ गावा ॥१
भाँठ कहा इँहमों क न होई । होइ रजायसु आनौं सोई ॥२
चहुँ दिसि भाँठै वन दौराये । बाज़िर हेर तोह ले आये ॥३
पूछा राउ कौन तोर ठाऊँ । सुर कण्ठ विह दीन्हि गुसाऊँ ॥४
आज रात निसईं तैं गावा । चंद्रावल मन रहराँ लाभा ॥५
गीत नाद सुर कबिस बखानी, कथा कहु गायनहार ।६
मोर मन रैन देवस सुरउ राउ, भूँजसु गाउँ गिसदार ॥७