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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 146

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पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—शुनीदने राब रूपचन्द नामे चाँदा व पुरसीदने बाज़िर रा सूरते
जेबाइये ऊ (चाँदाका नाम सुनकर राय रूपचन्दकी बाज़िरसे उसके
सौन्दर्यके प्रति जिज्ञासा )।
१—अहत । २—कोइ । ३—गैल । ४—भानीं । ५—सनबानी ।
६—गाँठ कहउ अब ठाँठ बिचारी । ७—करन कहि ओ करन बितेगी ।
८—कौन । —रूप । १ —कस ताह ।
टिप्पणी—(१) चटपटी—छटपटी, उत्सुकता ।
(३) तुरी—(सं तुरंग>तुरग>तुरीय>तुरी) घोड़ा । पाखर = पख्खर,
कवच ।
(५) बितेगी—बिछोह । बजर—अप्सरा ।
(७) पिंइक—पिण्ड शरीर । पराक्रित—प्रकृति, स्वभाव ।
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( रीट्सूक्स ४१ )
सिफ़ते फर्के चाँदा गुफ़्तन बाज़िर बर राव रूपचन्द
( राय रूपचन्दसे बाज़िरका चाँदाके माँगका वर्णन )
पहले माँग क कहउँ सोहागू । तिहिं राता जग खेलै फागू ॥१
माँग चीर सर मेंदुर पूरा । रंग चला जनु फानफेजूरा ॥२
दिया जोत रैन जस पारी । कारें सीस दीस रतनारी ॥३
म यह माँग चीर तर दीठी । उवत सूर जनु किरिन पइठी ॥४
माँथ पिराय जोत पँसारा । सगरै देस होइ उजियारा ॥५
राउ रूपचंद बोला, पुनि मई छाँड गाउ ।६
माँग सुनत मन राता, बाज़िर करब बिपाउ ॥७
टिप्पणी—(१) राता—अनुरक्त ।
(२) मेंदुर पूरा = माथे सिन्दूर भरनेको स्त्रियाँ सिन्दूर पूरना कहती हैं ।
फानकेजूरा—कनकधतूरा, धतूरा का एक अच्छा पौधा ।