बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)
Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad
सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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सुर नर मुनि जाको अंत न पावहिं, सो मोरे नैनन आगो ॥३॥
हरि रँग जुगन जुगन उँजियारो, जन बुल्ला साधुन साँगों१ ॥४॥
॥ शब्द १३ ॥
भासत२ काहे न जोगिया, यह मरै बिरह दुख रोगिया ॥ १ ॥
बिनु जोगी समुझे कल न परतु है, क्यों जीबै जन रोगिया ।
घोर घनेरी सूल उठत है, यह दुख जानै रोगिया ॥ २ ॥
आवै जोगी करै तबीबी३, तब सुख पावै रोगिया ।
मथि मन पवन जे दारू४ लगाई, जन बुल्ला दुख भगिया ॥ ३ ॥
॥ शब्द १४ ॥
न्हान को गंग जमून तट जैबों ।
तन मन धन न्यौछावर वारों, जगमग जोति जगैबों ॥ १ ॥
पवना उलटि भजन नित करिबों, सुखमन सेज बिछैबों ।
प्रेम बिलास आस साधुन में, निर्गुन रूप कहैबों ॥ २ ॥
पाप पुन्न दुख सुखहिं बहैबों, अमृत नाम पियैबों ।
होत अनन्द बिनोद ब्रह्म को, बहुरि न या कलि ऐबों ॥ ३ ॥
दया धरम मेरे नाम खजाना, ज्ञान रतन भरि लैबों ।
अद्भुत रूप कहाँ लग बरनों, अनहद में हद कैबों ॥ ४ ॥
सुरति सुहागिन चरन मनावहि, खसम आपनो पैबों ।
जन बुल्ला है प्यारी खसम की, रहसि रहसि गुन गैबों ॥ ५ ॥
॥ शब्द १५ ॥
हे मन करु गोबिंद से प्रीत ।
बीच मैदान में देइयो, चौहट नगारा जीत ॥टेक ॥
स्त्रवन सुनि ले नाद प्रभु की, नैन दरसन पेख ।
अचल अमर अलेख प्रभुजी, देखही कोउ भेष ॥ १ ॥
भाव सँग तू भक्ति करि ले, प्रेम से लवलीन ।
सुरति से तू बेर५ बाँधो, मुलुक तीनो छीन ॥ २ ॥
(१) संग । (२) दरसना । (३) इलाज । (४) दवा । (५) बेड़ा ।