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बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)

Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad

सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished36 पृष्ठ

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प्रेम ११
॥ शब्द ८ ॥
लगन धुनि लागी सो पागी, परम गति जागी । १ ॥
अस लागी जस चन्द्र चकोरहिं, चुगत निगुन¹ गति आगि ॥ २ ॥
जन बुल्ला जेहिं सहजहिं लागी, सो गुरु सब्द अनुरागी ॥३॥
॥ शब्द ९ ॥
मोर मनुवाँ मनावै धावै पिया नहिं आवै हो ॥ टेक ॥
सासु मोरी दारुनी² ससुर मोर भोला हो ॥ १ ॥
ननद बैरिन भैली काढ़ि दइ डोला हो ॥ २ ॥
सेंदुरा बाँधल पिय हिय की पाटे³ हो ॥ ३ ॥
बुल्ला डर मानै पिया की झपाटे⁴ हो ॥ ४ ॥
॥ शब्द १० ॥
देखो पिया काली घटा मो पै भारी ॥ १ ॥
सूनी सेज भयावन लागी, मरों बिरह की जारी ॥ २ ॥
प्रेम प्रीति यहि रीति चरन लघु, पल छिन नाहिं बिसारी ॥ ३ ॥
चितवत पंथ अंत नहिं पायो, जन बुल्ला बलिहारी ॥ ४ ॥
॥ शब्द ११ ॥
अस धुनि में रहु मेरे मनुवाँ ॥ टेक ॥
निरखि त्रिबेनी छोड़ि दे तनुवाँ । अष्ट कँवल दल उलटि फुलनुवाँ ॥ १ ॥
गगन गुफा हँस कियो है पयनुवाँ५ । अनहद बाजा बाज बजनुवाँ ॥२॥
थकित भयो सुनि आयो गवनुवाँ । बैठि सभा साधु संत जननुवाँ ॥३।
अविगत लीला अलख लखनुवाँ । बुल्ला बलिहारी सतगुरु की,
जिन अस नाच नचनुवाँ ॥४॥
॥ शब्द १२ ॥
रँग लागो गोरिया आजु रँग लागो, आपा सोधि भ्रम भागो ॥टेक॥
तिरगुन गुन गुनहीं पर जोरा, निर्गुन नाम हिये पागो ॥१॥
झिलमिलि झिलमिलि तिर्बेनी संगम, अविगत गति ब्रह्म जागो। २।
(१) निर्गुन । (२) कट्टर । (३) पाटी, माँग । (४) जल्दी । (५) चलना ।

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