बुल्ला साहिब का शब्दसार (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - जीवन-चरित्र एवं अमर पद)
Bulla Sahib Ka Shabdasara: Belvedere Press Allahabad
सन्त बुल्ला साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्मज्ञान १३
अधम अधीन अजाति बुल्ला, नाम से लवलीन ।
अर्थ धर्म अरु काम मोछहिं, आपने पद दीन ॥ ३ ॥
ब्रह्मज्ञान
॥ शब्द १ ॥
जिन जिन जन्म लखो१, तिन को दरस भयो ।
आनंद मगन रहत निस बासर, दुबिधा धोख जँजाल गयो ॥ १ ॥
जन्म पदारथ यहि जो स्वारथ, पाँच तत्त गुन तीनी ।
उलटि निरंतर निरखि बिचारो, परम तत्त निज चीन्ही ॥ २ ॥
बार बार के अवन गवन में, कर्म भर्म की धार ।
खोजत खोजत सतगुरु पाये, उतरि परो भवपार ॥ ३ ॥
बैठो जाइ के संत सभा में, जहाँ अमरपुर लोग ।
आवागवन कबहिं नहिं होई, इहै हमारो जोग ॥ ४ ॥
जन बुल्ला ब्रह्मज्ञान बोलतु है, सकल बेद को मूल ।
बूझन वाले बूझि लहिंगे, जिन्ह देखी सब खूल२ ॥ ५ ॥
॥ शब्द २ ॥
हौं बौरहा दिवाना तातें बोलत हौं ब्रह्मज्ञाना ॥ टेक ॥
संतन जहाँ जहाँ मन माना, दूजा दूरि लुटाना ॥ १ ॥
परम जोति से ध्यान लगो है, आवा गवन नसाना ॥ २ ॥
उलटि सर्प जब माँद३ समाना, बिधि परपंच मिटाना ॥ ३ ॥
जन बुल्ला दाया सतगुरु की, ऐसा अमल कमाना ॥ ४ ॥
॥ शब्द ३ ॥
संतो अमल हमारे नाम की ॥ १ ॥
आठ पहर मन छकै रहतु है, परम तत्त निरकार४ की ॥२॥
रहत अधार सत्त सुकिरति कै, मेटे भरम बिकार की ॥३॥
(१) जिस जिस ने जन्म लखा यानी बारम्बार जनम मरन की पीड़ा को बिचारा ।
(२) जानकार (अभ्यासी) कि जिन्होंने अभ्यास की आँखों से सब भेद खुला देखा है वही
जान लेंगे । (३) बाँबी । (४) निरंकार ।