बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
पृष्ठ 617, कुल 760 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहगोचाराध्यायः ५८९
यदि जन्मराशि से द्वितीय में बुध हो तो अनादर और धन का लाभ, तृतीय में हो तो
मित्र का लाभ कराने वाला, राजा और शत्रु के भय से शङ्कित होकर अपने दुश्चरित्रों के
कारण भागने वाला होता है। यह द्रुतपद छन्द है॥२०॥
धनगते द्वितीयस्थानस्थे शशिसुते बुधे। परिभवोऽसम्मानो भवति। सहजगे तृतीयस्थानस्थे
बुधे सुहृदयाप्तिर्मित्रलाभो भवति। स्वैरात्मीयैर्दुश्चरितैः। नृपतिशत्रुभयशङ्कितचित्तः। नृपती
राजा। शत्रुररिः। तद्भयैः शङ्कितं सञ्जातशङ्कं चित्तं मनो यस्य। तथाभूतो द्रुतपदं त्वरितपदं
व्रजति गच्छति। सापराधत्वात् सभयत्वाच्च। वृत्तमेतद् द्रुतपदम्। तल्लक्षणम्—
द्रुतपदं नभजयैः कथितं तत्।
नस्त्रिलघुः। भ आदिगुरुः। जो गुरुमध्यः। आदिलघुर्यः। एतैर्द्रुतपदमेतद् वृत्तं कथितम्।
न्यासः— न भ ज य
।।। ऽ।। ।ऽ। ।ऽऽ
अथ चतुर्थपञ्चमस्थस्य बुधस्य फलं रुचिरयाऽऽह—
चतुर्थगे स्वजनकुटुम्बवृद्धयो धनागमो भवति च शीतरश्मिजे।
सुतस्थिते तनयकलत्रविग्रहो निषेवते न च रुचिरामपि स्त्रियम्॥२१॥
यदि जन्मराशि से चतुर्थ में बुध हो तो अपने जन और बन्धुओं की वृद्धि एवं धन
की प्राप्ति होती है। पञ्चम में हो तो पुत्र और स्त्री के साथ कलह और अपने उद्वेग के
कारण सुन्दरी स्त्री का भी उपभोग नहीं होता है। यह रुचिरा छन्द है॥२१॥
चतुर्थगे शीतरश्मिजे चन्द्रपुत्रे बुधे। स्वजनकुटुम्बवृद्धयः। स्वजना आत्मीयजनाः।
कुटुम्बा ज्ञातयः। एषां वृद्धयः। धनागमश्च भवति। सुतस्थिते पञ्चमस्थानस्थिते बुधे।
तनयकलत्रविग्रहः। तनयाः पुत्राः। कलत्रं भार्या। तैः सह विग्रहः कलहः। रुचिरां शोभना-
मपि स्त्रियं रामां न निषेवते नोपभुङ्क्ते। सोद्वेगत्वात्। वृत्तमिदं रुचिरा। तल्लक्षणम्—
जभौ सजौ गिति रुचिरा चतुर्ग्रहैः।
जो गुरुमध्यः। भ आदिगुरुः। सोऽन्तगुरुः। पुनर्जकारः। अन्ते गुरुः। इत्येवंप्रकारः।
चतुर्ग्रहैः। चतुर्थवर्णैर्नवमवर्णैश्च विरामः॥२१॥
न्यासः— ज भ स ज गु
।ऽ। ऽ।। ।।ऽ ।ऽ। ऽ
अथ षष्ठसप्तमाष्टमस्थस्य बुधस्य फलं प्रहर्षण्याऽऽह—
सौभाग्यं विजयमथोन्नतिं च षष्ठे वैवर्ण्यं कलहमतीव सप्तमे ज्ञः।
मृत्युस्थे जयसुतवस्त्रवित्तलाभा नैपुण्यं भवति मतिप्रहर्षणीयम्॥२२॥
यदि जन्मराशि से छठी राशि में बुध हो तो सौभाग्य, विजय और उन्नति कराता है।
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA