बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
DevanagariHindipublished760 पृष्ठ
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वास्तुविद्याध्यायः ३३
चतुरस्रे एकाशीतिपदो वास्तुनरः
ई पू अनलः आ
| शिखी | पर्जन्यः | जयन्तः | इन्द्रः | सूर्यः | सत्यः | भृशः | अन्तरिक्षः | अनिलः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दितिः | आपः | जयन्तः | इन्द्रः | सूर्यः | सत्यः | भृशः | सावित्रः | पूषा |
| अदितिः | अदितिः | आपवत्सः | अर्यमा | अर्यमा | अर्यमा | सविता | वितथः | वितथः |
| भुजगः | भुजगः | पृथिवीधरः | ब्रह्मा | ब्रह्मा | ब्रह्मा | विवश्वान् | बृहक्षतः | बृहक्षतः |
| उ | सोमः | सोमः | पृथिवीधरः | ब्रह्मा | ब्रह्मा | ब्रह्मा | विवश्वान् | यमः |
| भल्लाटः | भल्लाटः | पृथिवीधरः | ब्रह्मा | ब्रह्मा | ब्रह्मा | विवश्वान् | गन्धर्वः | गन्धर्वः |
| मुख्यः | मुख्यः | राजयक्ष्मा | मित्रः | मित्रः | मित्रः | इन्द्रः | भृङ्गराज | भृङ्गराज |
| नागः | रुद्रः | शोषः | असुर | वरुणः | कुसुमदन्तः | सुग्रीवः | जयः | मृगः |
| रोगः | पापयक्ष्मा | शोषः | असुरः | वरुणः | कुसुमदन्तः | सुग्रीव | दौवारिकः | पिता |
| वा प नै | ||||||||
| बृ० सं० द्वि०-३ | ||||||||
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