बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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४१० बृहत्संहिता
दिक्षु स्थिते शुभे शकुन एतेषु स्थानेषु रूप्यादीनां लब्धिरशुभे हानिः। संयोगो वियोगो
वा केनचित् सह चौरादिस्थानपरिग्रहमिति।।८०।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ सर्वशाकुने
मिश्रकं नाम षडशीतितमोऽध्यायः ॥८६॥