सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 438, कुल 760 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 438

४१० बृहत्संहिता
दिक्षु स्थिते शुभे शकुन एतेषु स्थानेषु रूप्यादीनां लब्धिरशुभे हानिः। संयोगो वियोगो
वा केनचित् सह चौरादिस्थानपरिग्रहमिति।।८०।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ सर्वशाकुने
मिश्रकं नाम षडशीतितमोऽध्यायः ॥८६॥