बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्रहयुद्धाध्यायः २९९
अथ जयिनो लक्षणमाह—
उक्तविपरीतलक्षणसम्पन्नो जयगतो विनिर्देश्यः।
विपुलः स्निग्धो द्युतिमान् दक्षिणदिक्स्थोऽपि जययुक्तः ॥१०॥
पूर्वोक्त लक्षण से विपरीत लक्षणयुत (उत्तर दिशा में स्थित, स्निग्ध, कम्पन से
रहित, दूसरे ग्रह को प्राप्त करने वाला, ऊपर में स्थित और तेजस्वी) हो तथा दक्षिण में
स्थित होने पर भी यदि विपुल, निर्मल, कान्तियुत बिम्ब वाला ग्रह हो तो विजयी होता है।
दक्षिणदिक्स्थः परुष इत्यादिना ग्रन्थेन यल्लक्षणमुक्तं तस्माद्विपरीतलक्षणसम्पन्नः।
तद्यथोत्तरदिक्स्थः स्निग्धोऽवेपथुः सम्यक्प्राप्तो विपुल उपरिस्थितः। अविकृतस्तेजस्वी
स जययुक्तः। तथा च गर्गः—
द्युतिमान् रश्मिसम्पन्नः प्रसन्नो रजतप्रभः।
बृहद्रूपधरश्चैव यः समेत्य ग्रहो भवेत्॥
प्रभावर्णाधिको यश्च ग्रहमावृत्य तिष्ठति।
तादृशं जयिनं विन्द्याद् ग्रहं ग्रहसमागमे॥
एवंविधो ग्रहो जयगतो विनिर्देश्यो वक्तव्यः। तथा यो विपुलो बृहद्विम्बः। स्निग्धो
निर्मलः। द्युतिमान् कान्तियुक्तः। स दक्षिणस्यां दिशि स्थितोऽपि जययुक्त इति। एतत्
शुक्रस्य प्रायः सम्भवति। तथा च पुलिशाचार्यः—
सर्वे जयिन उदक्स्था दक्षिणदिक्स्थो जयो शुक्रः।। इति।।१०।।
अन्यदप्याह—
द्वावपि मयूखयुक्तौ विपुलौ स्निग्धौ समागमे भवतः।
तत्रान्योन्यं प्रीतिर्विपरीतावात्मपक्षघ्नौ ॥११॥
यदि समागम-समय में दोनों ग्रह किरणयुक्त, विपुल या स्निग्ध हों तो दोनों ग्रहों के
वर्गों में प्रीति और विपरीत हों तो अपने-अपने पक्षों का नाश करते हैं।।११।।
द्वावपि ग्रहौ मयूखयुक्तौ रश्मिजालेन महता संयुक्तौ। विपुलौ विस्तीर्णौ। स्निग्धौ
निर्मलौ। यदि समागमे संयोगे भवतः। तत्र तस्मिन् समागमे। अन्योन्यं परस्परं प्रीतिस्थौ
ग्रहौ येषामुक्तौ रविराक्रन्दो मध्य इत्यनेन तेषां प्रीतिर्मैत्री भवति। तावेव ग्रहौ विपरीतौ रश्मि-
रहितौ। अल्पौ रूक्षौ। यदि समागमे भवतस्तदात्मीयपक्षघ्नौ स्वं-स्वं पक्षं हतः।।११।।
अत्रापि विशेषमाह—
युद्धं समागमे वा यद्यव्यक्तौ स्वलक्षणैर्भवतः।
भुवि भूभूतामपि तथा फलमव्यक्तं विनिर्देश्यम् ॥१२॥
युद्ध (भौम आदि ग्रहों का परस्पर युद्ध) और समागम (चन्द्र के साथ सम्मेलन)
यदि अपने-अपने उक्त लक्षणों से अव्यक्त (अप्रकाशित) हो (जैसे युद्ध में कौन ग्रह
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