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सर्वकोश
बृहद्देशी (मतंग मुनि - राग-पद्धति का विश्व में सर्वप्रथम प्रतिपादक ग्रन्थ)

बृहद्देशी (मतंग मुनि - राग-पद्धति का विश्व में सर्वप्रथम प्रतिपादक ग्रन्थ)

The Brihaddeshi of Sri Matanga Muni

मतंग मुनि (सम्पादक: के. साम्बशिव शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished175 पृष्ठ

पृष्ठ 67, कुल 175 में से

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पृष्ठ 67

३. 'प्या', ४. 'स', ५. 'मवि' ल. पाठः.`

  1. Confirm exact characters:
    • Top: जातयः । and ५७
    • Line 6: सोऽशः or सोऽंशः? The text clearly omits the anusvara: सोऽशः । (same in line 3: सोऽशो).
    • Line 6: यस्मोद्वारभ्य vs यस्मादारभ्य - let's look at यस्मोद्वारभ्य: it has an 'o' stroke on स्म. Let's keep यस्मोद्वारभ्य.
    • Line 17: गीतकेशी vs गीतदेशी?
      Look at line 17: यावत् । गीतकेशी गीतखण्डमिति यावत् । - the letter is क with े, श with ी -> गीतकेशी.
    • Line 18: इदानीं स न्यासोऽभिधीयते । - notice space after स? स न्यासोऽभिधीयते or संन्यासोऽभिधीयते?
      Wait! In line 18: इदानीं स न्यासोऽभिधीयते - there is a space and a faint dot or mark: `स न्यासोऽभिधीय