बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)
Bihari Satsai with Hindi Commentary
महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसप्तमशतक ७. ( २२९ )
घर घरमें हिन्दुओंकी और तुरकोंकी स्त्री सराहना कर
अशीश देती हैं कि, हमारे पतियोंकी रक्षाकर जय शाहने
हमारी चूरी और चादर रक्खी वैधव्यमें हिन्दुओंमें चूरी और
तुरकोंमें चादरका त्याग होता है "उत्प्रेक्षालंकार" ॥ ७०४॥
सामा सेन सयानकी, सबै शाहके साथ ।
बाहुबली जयशाहजू, फते तिहारे हाथ ॥७०५॥
सामान सेना चातुरीयुक्त सब दिल्लीपतिकी शाहके
साथ है परन्तु हे बाहुबली जयशाहजी ! फतह ( जीत )
आपहीके हाथ है 'तुम जहाँ जातेहो जीततेहो' ( दक्षिणका
युद्ध है ) ॥७०५॥
हुकम पाय जयशाहको, हरिराधिकाप्रसाद ।
करी बिहारी सतसई, भरी अनेक सवाद॥७०६॥
जयशाहका हुकम पाकर हरि राधिकाके प्रसादसे बिहारी-
दासने अनेक संवादभरी सतसई निर्माण करी ॥ ७०६ ॥
सम्बतग्रहशशिजलधिक्षिति, छठतिथिवासरचंद।
चैतमास पख कृष्णमें, पूरण आनंदकंद॥७०७॥
संवत १७१९ में चैत्रकृष्ण छठ चंद्रवारके दिन यह सत-
सई पूर्णहुई ग्रह ९ शशि १ जलधि ७ क्षिति १ अंकों
की वामगतिसे १७१९ सम्बत हुए ॥ ७०७ ॥