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सर्वकोश
बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

Bihari Satsai with Hindi Commentary

महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा

DevanagariHindipublished290 पृष्ठ

पृष्ठ 164, कुल 290 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 164

" -> no space, "क्यों न होय बेहाल ।"

Let's check line 17:
"यह कुटिल कटाक्षक वाण लगनेमें क्यों न प्रीतम बेहाल"
Wait, is it "कटाक्षक" or "कटाक्षके"?
Look at line 17:
"कटाक्षक" -> wait, look above the 'क':
Is there an 'े' matra?
Yes! There is a slant stroke above 'क': "कटाक्षके"!
Wait, let's look at it:
"कटाक्षके वाण लगनेमें" -> yes, grammatically and typographically "कटाक्षके"!

Let's check line 18:
"हों यद्यपि कलेजेमें लगकर पार होजातेहैं, तोभी फांसकी"
Wait, "हों" or "हौं"?
Look at the first word of line 18:
"हों" or "ह्वै"?
It has 'ह' + 'ो' + bindi = "हों".
Wait, could it be "ह्वै"? No, "हों".
Then "यद्यपि कलेजेमें लगकर पार होजातेहैं, तोभी फांसकी"
Wait, is it "होजातेहैं,"?
Yes.

Let's check line 19:
"समान खटकतेहैं । 'विभावना' ॥ ३३० ॥"

Let's check line 1:
"चतु