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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 723

४४४ भारत में अंगरेज़ी राज
यह तजवीज़ भारत में अंगरेज़ी राज का अस्तित्व क़ायम रखने के लिए कितनी
ज़रूरी है।"
इस पत्र में भी तजवीज़ को गुप्त रखने पर फिर खूब ज़ोर दिया
गया।
मार्किस वेल्सली के एक पत्र से मालूम होता है कि इतने पर
भी अज़ीमुलउमरा अन्त तक कुछ झिझकता रहा।
[मार्जिन: अज़ीमुलउमरा] सम्भव है उसकी आत्मा भीतर से उसे दिक़
[मार्जिन: की घबराहट] करती हो, या सम्भव है कोई और सबब रहा
हो। जो हो, उसने निज़ाम की सेना को बरख़ास्त करने में देर की।
अंगरेज़ों के लिए इस तरह के मामले में देर ख़तरनाक हो सकती
थी। इसलिए मैलकम और कर्कपैट्रिक ने दूसरी ओर से भी अपना
इन्तज़ाम कर लिया था। उन्होंने निज़ाम की सेना के अन्दर भी
अपने षड्यन्त्र का जाल पूर रक्खा था। कम्पनी की सेना बिना
निज़ाम की सेना के बरख़ास्त होने का इन्तज़ार किए मद्रास से
हैदराबाद के लिए चल पड़ी। कप्तान मैलकम की जीवनी का
रचयिता सर जॉन के लिखता है कि—"हमारे सौभाग्य से ऐन
मौक़े पर निज़ाम की पल्टनें अपने अफ़सरों के विरुद्ध बलवा कर
बैठीं। क्योंकि उनकी तनख़ाहें चढ़ गई थीं। उन्होंने अपने फ़्रांसीसी
सेनापति को क़ैद कर लिया।"* इत्यादि। जॉन के यह नहीं
बतलाता कि किन तरीक़ों से रेजिडेण्ट और उसके असिस्टेण्ट ने
निज़ाम की फ़ौजों को "ऐन मौक़े पर" बलवा करने के लिए तैयार

  • Kaye's Life of Malcolm.