भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवेल्सली और निज़ाम ४४३
छिपा कर और उसके साथ दग़ा करके उसका बल बढ़ाना चाहता
था। सीधे शब्दों में इस वाक्य का मतलब था "निज़ाम की हुकूमत
का अन्त हो जावे।" और आगे चल कर वेल्सली लिखता है—
"मैं एक कहीं अधिक बड़ी तजवीज़ तमाम रियासतों के साथ इसी तरह
की सन्धियों करने की कर रहा हूँ, और इस समय की तजवीज़ केवल उस
बड़ी तजवीज़ का एक हिस्सा है। x x x मेरा ख़याल है कि जो फ़ौज
हैदराबाद भेजनी है, उसे जमा करने के लिए सब से अच्छी जगह गुगटूर
होगी x x x इस बात को गुप्त रखने की अत्यन्त कड़ी से कड़ी अह्तियात
की जावे। x x x जो जगह आप तय करें उसकी सूचना हैदराबाद के क़ायम
मुक़ाम रेज़िडेण्ट को दे देना आवश्यक होगा, ताकि वह कमाण्डिङ्ग अफ़सर
के साथ पत्र व्यवहार कर सके। x x x अपनी तमाम काररवाई आप पूना
और हैदराबाद के रेज़िडेण्टों को लिखते रहें, किन्तु केवल उनकी अपनी
सूचना के लिए, उन्हें लिख भेजें कि वे अपने यहाँ के दरबारों को इसकी
ख़बर न होने दें।"*
जनरल हैरिस के नाम १६ अगस्त के पत्र में वेल्सली ने लिखा—
" x x x मेरे १६ जुलाई के पत्र से आपको पता चल गया होगा कि
- "My object isto restore the Nizam to some degree of efficiency and
power. The measure forms part of a much more extensive plan for the
establishment of our alliances, . . . . the best position for assembling
the troops destined for Hyderabad, would be in the Guntur Circar . . .
the most strict attention to secrecy in the whole of this proceeding; . . .
you will communicate the whole proceeding to the Residents at Poona
and Hyderabad for their information only, and not to be imparted to their
respective Courts."—Marquess of Wellesly to General Harris, 15th
July, 1798.