भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरेख के लिए पालिंमेण्ट की ओर से बनाया गया था। इससे पहले
के एक गवर्नर जनरल लॉर्ड कॉर्नवालिस और इंगलिस्तान के
प्रधान मन्त्री पिट से वेल्सली की गहरी मित्रता थी। इन दोनों की
मदद से सन् १७६३ से १७६८ तक वेल्सली इंगलिस्तान में बैठा
हुआ भारतीय इतिहास और भारत की उस समय की राजनैतिक
हालत का गौर से अध्ययन करता रहा। वेल्सली को भारत भेजने
से पहले प्रधान मन्त्री पिट ने उसे एक सप्ताह अपने पास रख
कर हिन्दोस्तान के अन्दर एक विशाल ब्रिटिश साम्राज्य क़ायम
करने की सम्भावना और उसके उपायों पर उसके साथ ख़ूब
बातचीत की। इस तरह शिक्षा पाकर वेल्सली ७ नवम्बर सन्
१७६७ को अपने देश से रवाना हुआ और मार्ग में दो महीने
अफ़रीका की आशा अन्तरीप में ठहर कर मई सन् १७६८ में
कलकत्ते पहुँचा।
अठारवीं सदी के अन्त में पच्छिम के देशों में क़ौमी आज़ादी
[हाशिया: यूरोप में क़ौमी आज़ादी की लहर] की एक ज़बरदस्त लहर चल रही थी। 'स्वतन्त्रता'
'समता' और 'मनुष्य मात्र के बन्धुत्व' की
आवाज़ें चारों ओर गूंज रही थीं। ४ जुलाई सन्
१७७६ को अमरीका ने अपने आपको इङ्गलिस्तान की दासता से
स्वतन्त्र कर देश में प्रजातन्त्र राज (रिपब्लिक) की स्थापना
की। ७ वर्ष के भयङ्कर रक्तपात के बाद ३० नवम्बर सन् १७८२ को
इंगलिस्तान ने लाचार होकर अमरीका की 'स्वाधीनता' को स्वीकार
किया। सन् १७८६.में फ्रांस की जगद् प्रसिद्ध राजक्रान्ति का