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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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सर जॉन शोर ४१७
थे । अनेक बार पार्लिमेण्ट में इन क़र्ज़ों के विषय में पूछ ताछ की
गई । किन्तु इंगलिस्तान के मन्त्री बराबर टालमटोल और तरह तरह
की चालाकियों से काम लेते रहे। मिसाल के लिए नवाब को
क़र्ज़ देने वालों में एक अंगरेज़ पाल बेन्फ़ील्ड भी था। किन्तु
क़र्ज़ख़ाहों की जो सूचियाँ समय समय पर पार्लिमेण्ट के सामने
पेश की जाती थीं उनमें बेन्फ़ील्ड का नाम कभी उड़ा दिया जाता
था और कभी फिर जोड़ दिया जाता था। बात यह थी कि
बेन्फ़ील्ड और उसके अनेक साथियों ने पार्लिमेण्ट के चुनाव के
समय मन्त्रिमण्डल का पक्ष लेने वाले सदस्यों को चुनवा कर भेजने
में खूब धन ख़र्च किया था और मन्त्रियों के मुंह बन्द कर दिए
थे ।* पार्लिमेण्ट के अन्दर भी क़ुदरती तौर पर उस समय के
मन्त्रियों ही का प्रभाव था।
इसी सम्बन्ध में इतिहास लेखक विलियम हाविट लिखता है—
“जिस ढङ्ग से यातनाएँ दे देकर भारतीय नरेशों की रियासतें उनसे
ज़बरदस्ती छीनी गई हैं वह यह है कि चालबाज़ लोगों ने पहले तो बड़ी
होशियारी के साथ उन नरेशों को अपना क़र्ज़दार बनाया और फिर उन्हें अपनी
अत्यन्त बेजा माँगों के सामने तुरन्त सर झुकाने के लिए विवश कर दिया।”†
१३ अक्तूबर सन् १७६५ को ७६ साल की आयु में नवाब

  • Thornton in his History of British India, 2nd Edition 1859, pp. 181,

† “What then is this system of torture by which the possessions of the
Indian Princes have been wrung from them? It is this—the skilful applica-
tion of the process by which cunning men creat debtors, and then force
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