भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१८ भारत में अंगरेज़ी राज
मोहम्मदअली की मृत्यु हुई । उसका बेटा नवाब उमदतुल उमरा
करनाटक की मसनद पर बैठा और बाप के झूठे और अनसुने कर्ज़े
उसे उत्तराधिकार में मिले।
लॉर्ड कॉर्नवालिस के समय में कम्पनी और मोहम्मदअली के
दरमियान एक सन्धि हो चुकी थी, जिससे करनाटक की सेना का
सारा प्रबन्ध अंगरेज़ों के हाथों में आ गया था और करनाटक के
कुछ ज़िले इन कर्ज़ों के बदले में नवाब से रहन रखा लिए गए थे।
उमदतुल उमरा के मसनद पर बैठते ही मद्रास के गवर्नर ने उस
पर ज़ोर दिया कि आप रहन रक्खे हुए ज़िले और कुछ और क़िले
सदा के लिए कम्पनी को दे दें । २८ अक्तूबर सन् १७९५ को सर
जॉन शोर ने मद्रास के गवर्नर को लिखा—"आप नए नवाब को
इस बात पर राज़ी कीजिये कि वह अपनी तमाम रियासत कम्पनी
के सुपुर्द कर दे।" नवाब उमदतुल उमरा ने मद्रास के गवर्नर की
कोई बात मंजूर न की और कम से कम उस समय इस चाल से
करनाटक का कोई हिस्सा कम्पनी की अमलदारी में न आ सका।
किन्तु करनाटक की ओर अंगरेज़ों की नीयत बिल्कुल ज़ाहिर
हो गई।
सन् १७९४ में रुहेलखण्ड के नवाब फ़ैजुल्ला ख़ाँ की मृत्यु हुई ।
रुहेलखण्ड उसका छोटा बेटा गुलाम मोहम्मद अपने बड़े भाई
आली ख़ाँ को मार कर बाप की गद्दी पर बैठा ।
them at once to submit to their most exorbitant demands."-William How
as quoted in the introduction to Thornton's History of British India.