भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 669, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें३६२ भारत में अंगरेज़ी राज
आगे चल कर टॉरेन्स लिखता है :—
“कोई भी समझदार और न्यायशील इतिहास लेखक इन कामों पर
बिना आश्चर्य प्रकट किए और उन्हें निन्दनीय ठहराए उनका उल्लेख नहीं
कर सकता ।”*
कॉर्नवालिस ने देश भर में नई अंगरेज़ी अदालतें क़ायम करके
नई अंगरेज़ी इन भारतीय ग्राम पंचायतों के रहे सहे चिन्हों
अदालतें का अब सदा के लिए अन्त कर दिया ।
कॉर्नवालिस की इन करतूतों को 'शासन सुधारों'
का नाम दिया जाता है। इतिहास लेखक मिल ने बड़ी योग्यता
और विस्तार के साथ दर्शाया है कि किस प्रकार कॉर्नवालिस के
इन 'शासन सुधारों' (?) ने—“भारत की प्राचीन ग्राम पंचायतों
का सत्यानाश कर दिया, नई अंगरेज़ी कचहरियों की तमाम
कार्रवाइयों को जान बूझ कर लम्बा और पेचीदा बना दिया,
वकीलों को जन्म दिया और इस तरह के क़ानून बना दिए कि
बिना वकील की मदद के किसी मुक़दमे का चल सकना क़रीब
क़रीब नामुमकिन हो गया, ग़रीबों के लिए न्याय प्राप्त कर सकना
नामुमकिन कर दिया, सरकार के लिए एक तरह के नियम और
मामूली प्रजा के लिए दूसरी तरह के नियम रख कर सरकार के लिए
अपनी मालगुज़ारी वसूल कर सकना सस्ता और आसान कर
दिया, इंगलिस्तान के हज़ारों निकम्मे लड़कों की जीविका का
- “ No wise or just historian will note these things without expressions
of wonder and condemnation.”— Ibid p 103.