भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलॉर्ड कॉर्नवालिस ३६१
इन हज़ारों बरसों की ग्राम पंचायतों पर सबसे पहला हमला
[हाशिया: ग्राम पंचायतों का] उस समय हुआ जब कि बंगाल के अन्दर मीर
[हाशिया: नाश] जाफ़र और मीर क़ासिम के शासन काल में
ईस्ट इंडिया कम्पनी की भयंकर तिजारती तथा
कारबारी लूट और अनेक मौक़ों पर बेपरदा और खुली लूट का
दौर शुरू हुआ। दूसरा बाक़ायदा हमला भारत की ग्राम पंचायतों
पर सन् १७७३ में हुआ जबकि वारन हेस्टिंग्स के शासन काल में
इंग्लिस्तान के अन्दर 'रेगुलेशन ऐक्ट' नाम का क़ानून पास हुआ,
जिसके अनुसार वारन हेस्टिंग्स के मशहूर दोस्त सर एलाइज़ाह
इम्पे के अधीन कलकत्ते में पहली अंग्रेज़ी हाईकोर्ट क़ायम हुई।
उस समय से ही, टॉरेन्स लिखता है :—
"इससे पहले के तमाम राजकुलों के परिवर्तनों में मुसलमान या मराठे
सब भारतीय नरेश जिन (म्यूनिसिपल) पंचायतों का पूरा पूरा लिहाज़ रखते
थे और जिन्हें उन लोगों ने निस्सन्देह बिलकुल ज्यों का त्यों क़ायम रखा था,
अब नए विदेशी शासकों ने उन प्राचीन पंचायतों का पूरी तरह निरादर
किया और उनमें से अधिकांश को निर्दयता के साथ उखाड़ कर फेंक दिया।
देशी पंचों की अदालत की जगह अब एक स्वेच्छाचारी विदेशी जज बैठा
दिया गया।"*
- "Yet these Municipal institutions, which confessedly had been
scrupulously respected in all former changes of dynasty, whether Moham-
madan or Maratha, were henceforth to be disregarded, and many of them
to be rudely uprooted by the new system of foreign administration. Instead
of the native Panchayat, there was established an arbitrary judge."-- Ibid,
p. 102, 103.