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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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लॉर्ड कॉर्नवालिस ३७५
जितना इलाक़ा टीपू से विजय किया जावेगा वह सब कम्पनी,
निज़ाम और मराठों में बराबर बराबर बाँट दिया जावेगा। कॉर्न-
वालिस का दिया हुआ लोभ अपना काम कर गया। निज़ाम का
चरित्र कभी भी अधिक विश्वास के योग्य न रहा था। किन्तु इस
समय पेशवा दरबार का हैदर के बेटे के ख़िलाफ़ बिदेशियों के
हाथों में खेल जाना निस्सन्देह अत्यन्त अफ़सोसनाक था। टीपू के
विरुद्ध अंगरेज़ों, मराठों और निज़ाम में सन्धि हो गई। इस सन्धि
के बारे में उस समय के प्रसिद्ध अंगरेज़ नीतिज्ञ फ़ॉक्स ने कहा था
कि वह वास्तव में—"एक न्याय्य नरेश को मिटा देने के उद्देश से
डकैतों की साज़िश थी ।’*
इंगलिस्तान के मन्त्रियों ने समाचार पाते ही फ़ौरन कुछ गोरी
फ़ौज और पाँच लाख पाउण्ड नक़द बतौर क़र्ज़ कॉर्नवालिस की
मदद के लिए इंगलिस्तान से रवाना किए।
तमाम तैयारी पूरी हो गई, कॉर्नवालिस के लिए अब केवल
कोई बहाना ढूंढ़ना बाक़ी था। कहते हैं कि
[टीपू के साथ युद्ध] त्रिवानकुर के राजा और टीपू में कुछ झगड़ा
[का बहाना] चला आता था। त्रिवानकुर के राजा को यह
कह कर भड़काया गया कि टीपू तुम पर हमला करने का इरादा
कर रहा है। उस समय के तमाम पत्रों और उल्लेखों से साबित है
कि टीपू का त्रिवानकुर पर हमला करने का क़तई कोई इरादा न

  • "A plundering confederacy for the purpose of extirpating a lawful
    prince. "-Fox.