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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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[Header] हैदरअली ३२६

के पास भेजा, जिसमें लिखा था कि—"अंगरेज़ी सेना तुम्हारे
क़िले पर हमला करने वाली है, इसलिए तुम्हारी मदद के लिए
पाँच सौ सिपाही आज शाम को भेजे जावेंगे, क़िले का फाटक
खुला रखना।" चाल काम कर गई और उसी दिन शाम को कम्पनी
के वरदी बदले हुए सिपाहियों ने जाकर क़िले पर क़ब्ज़ा कर
लिया। मख़दूम को जब यह बात मालूम हुई तो उसने बदला लेने
का इरादा किया। चन्द रोज़ के अन्दर ही उसने अपने कुछ सवारों
को अंगरेज़ी वर्दियाँ पहना कर क़िले के सामने भेजा। इन सवारों
में से एक ने, जो इत्तफ़ाक़ से अंगरेज़ी सेना का भागा हुआ एक
अंगरेज़ सिपाही था, आगे बढ़ कर क़िले के अंगरेज़ अफ़सर से
चिल्लाकर कहा—"हैदर की सेना हम लोगों का पीछा कर रही है।
मेरी सेना के कमांडर की प्रार्थना है कि आप फाटक खोल दीजिये,
ताकि हम सब लोग भीतर आ जावें।" यह चाल भी चल गई और
मख़दूम की सेना ने फिर से उस क़िले के ऊपर क़ब्ज़ा कर लिया।
स्मिथ और वुड दोनों की सेनाएँ मिलकर अब हैदर की ग़ैर
हाज़िरी में बंगलोर विजय करने के इरादे से आगे बढ़ीं। राजधानी
श्रीरंगपट्टन के बाद पूरब में बंगलोर और पश्चिम में मंगलोर ही
मैसूर राज के प्रधान नगर थे।
उधर मंगलोर की प्रजा ने टीपू का बड़े उल्लास के साथ
स्वागत किया। बम्बई की अंगरेज़ी सेना और
[हाशिया: मंगलोर में टीपू की शानदार विजय] टीपू की सेना में एक भयंकर लड़ाई हुई जिसमें
टीपू ने पूरी विजय प्राप्त की। अंगरेज़ सेनापति,