भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२८ भारत में अंग्रेज़ी राज
ने अपना यह तमाम इलाक़ा, जो थोड़े दिनों के लिए अंग्रेज़ों के
हाथों में चला गया था, फिर से विजय कर लिया।
किन्तु जिस समय हैदर अपनी तमाम सेना सहित मैसूर राज
की पूर्वी सरहद पर था, अंग्रेज़ों ने एक नई सेना पीछे की ओर से
हैदरअली के पच्छिमी इलाक़े मंगलोर पर हमला करने के लिए भेज
दी। इस सेना ने हैदरअली की ग़ैर मौजूदगी में एक बार आसानी
से मंगलोर पर क़ब्ज़ा कर लिया। मंगलोर विजय की ख़ुशी में
फिर एक सौ एक तोपें मद्रास के क़िले से छोड़ी गईं। हैदरअली
को अब दो ओर से अंग्रेज़ों का मुक़ाबला करना पड़ा। सामने की
ओर जनरल स्मिथ और करनल वुड की सेनाएँ और पीछे की
ओर बम्बई की सेना।
मंगलोर के पतन की ख़बर पाते ही हैदर ने अपने बेटे टीपू को
तीन हज़ार सवार देकर मंगलोर की ओर भेजा। टीपू के पीछे पीछे
हैदर खुद थोड़ी सी सेना लेकर मंगलोर की ओर रवाना हुआ।
बाक़ी सेना उसने अपने सम्बन्धी मख़दूम के अधीन स्मिथ और
वुड के मुक़ाबले के लिए पूर्वी सरहद पर छोड़ दी।
जनरल स्मिथ और करनल वुड ने हैदर की ग़ैर हाज़िरी से
पूरा लाभ उठाया। जनरल स्मिथ ने एक छोटा
सा क़िला इस समय एक बड़ी सुन्दर चाल द्वारा
मख़दूम के आदमियों से ले लिया। स्मिथ ने
अपने एक हरकारे को मख़दूम के हरकारों की सी
पोशाक पहनाई। उसके हाथ मख़दूम का एक जाली पत्र क़िलेदार
[हाशिया / Side note: पंक्तियाँ L19–L22 के बाएँ]
जनरल स्मिथ की
चाल और उसका
जवाब