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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 601

३३० भारत में अंगरेज़ी राज

४६ अंगरेज़ अफ़सरों, ६८० अंगरेज़ सिपाहियों और ६,००० से
ऊपर कम्पनी के हिन्दोस्तानी सिपाहियों को टीपू ने इस लड़ाई में
क़ैद कर लिया और उनके तमाम अस्त्र शस्त्र और सामान ज़ब्त
कर लिया। मंगलोर की यह लड़ाई वास्तव में अंगरेज़ों और हैदर
दोनों के लिए बड़े मार्के की लड़ाई थी। केवल तीस दिन अंगरेज़ी
सेना के क़ब्ज़े में रहने के बाद मंगलोर का क़िला और नगर टीपू
के हाथों में आ गया। नौजवान बेटे की इस शानदार विजय के एक
दिन बाद हैदर अपनी सेना सहित मंगलोर पहुँचा। फ़तह की
ख़बर सुनते ही सुलतान हैदर ने टीपू को छाती से लगा लिया और
मारे ख़ुशी के उसकी आँखों में आँसू आ गए।
मङ्गलोर में पुर्तगाली ईसाइयों के तीन गिरजे थे। ये यूरोपियन
पादरी उस समय की प्रथा के अनुसार अपने को
ब्राह्मण ईसाई “ब्राह्मण ईसाई” कहा करते थे। ब्राह्मणों के से
कपड़े पहनते थे, गले में जनेऊ डालते थे, निरामिष भोजन करते
थे, खड़ाऊँ पहनते थे और ब्राह्मणों का सा सब आचार विचार
रखते थे। इस चाल से उन्हें हिन्दू जनता को ईसाई बनाने में
आसानी होती थी। ये लोग हैदर की प्रजा थे। हैदर ने इनके साथ
अनेक रिआयतें कर रक्खी थीं। फिर भी अंगरेज़ों के मङ्गलोर पर
हमला करते समय इन तीनों गिरजों के यूरोपियन पादरियों ने हैदर
के ख़िलाफ़ उसके शत्रुओं को मदद दी। हैदर को जब इसका पता
लगा तो उसने उनका माल असबाब ज़ब्त कर लिया और उन्हें