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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 593

३२२ भारत में अंगरेज़ी राज
कौन्सिल टीपू को अचानक मद्रास के सामने देखकर घबरा गए।
लिखा है कि जिस दिन प्रातःकाल टीपू के सवार मद्रास के पास
पहुँचे, गवरनर और उसकी कौन्सिल के मेम्बर और नवाब मोहम्मद
अली मद्रास के क़िले से कुछ दूर कम्पनी के एक बग़ीचे में हवा
खा रहे थे और दरख़्तों के नीचे खाना सजा हुआ था। इन लोगों
को इस तेज़ी से भागना पड़ा कि घबराहट में गवरनर की तलवार
और उसकी टोपी तक रह गई। सौभाग्यवश एक छोटा सा जहाज़
उस समय सामने था। गवरनर और उसके अंगरेज़ साथियों ने
भागकर इस जहाज़ में पनाह ली। एक यूरोपियन इतिहास लेखक
लिखता है कि यदि वह जहाज़ मौक़े पर न होता तो गवरनर और
उसके साथियों को टीपू के सवारों ने अवश्य क़ैद कर लिया होता।*
नवाब मोहम्मदअली अपने तेज़ घोड़े पर सवार होकर सड़क के
रास्ते मद्रास से भाग निकला।
टीपू ने मद्रास के क़िले से पाँच मील दूर सेण्ट टॉमस की
पहाड़ी पर क़ब्ज़ा कर लिया और आस पास के अंगरेज़ी इलाक़े
को अपने अधीन कर लिया।
इस बीच त्रिनमल्ली नामक स्थान पर हैदरअली और जनरल
[हाशिया: हैदरअली के साथ] स्मिथ का मुक़ाबला हुआ। निज़ाम की सेना
[हाशिया: निज़ाम का] अभी तक हैदर की सेना के साथ साथ थी,
[हाशिया: विश्वासघात] किन्तु निज़ाम और अंगरेज़ों में गुप्त बातचीत
हो चुकी थी। ऐन इस मौक़े पर अंगरेज़ी सेना

  • History of Hyder Shah, By M. M. D. L. T., p. 192.