भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहैदरअली ३९३
पर हमला करने के बहाने निज़ाम ने अपनी तमाम सेना को हैदर
और अंगरेज़ों की सेना के बीच में लाकर खड़ा कर दिया। थोड़ी
ही देर बाद निज़ाम ने अपनी सेना को इस बुरो तरह पीछे की ओर
भगाया कि हैदर की तमाम सेना में खलबली मच गई। हैदरअली
को अब पूरी तरह निज़ाम के विश्वासघात का पता 'चल गया ।
उसे मजबूर होकर अपनी सेना कुछ दूर पीछे हटा लेनी पड़ी।
फिर भी हैदर के एक सिपाही को भी गिरफ़्तार करने का अंगरेज़ों
को मौक़ा न मिल सका और न जनरल स्मिथ को आगे बढ़कर
हैदर पर हमला करने का साहस हुआ ।
हैदर के इस तरह पीछे हटने को उसकी पराजय बताकर अंगरेज़ों
ने खूब बढ़ा कर इस ख़बर को दूर दूर तक फैला दिया ।
यहाँ पर युद्ध के प्रसङ्ग से हटकर हम हैदरअली और उसकी
[पार्श्व-शीर्षक: हैदरअली की माँ] बूढ़ी माँ के सम्बन्ध की एक घटना बयान करना
चाहते हैं। हैदर की माँ उस समय लड़ाई के
मैदान से क़रीब दो सौ मील दूर हैदरनगर के महल में थी। बेटे
की इस पराजय की ख़बर उसके कानों तक पहुँची। वह फ़ौरन
पालकी में बैठकर अपने बेटे को हिम्मत दिलाने के लिए हैदरनगर
से चल पड़ी। बरसात के दिन, उस ज़माने की यात्रा के कष्ट और
उस पर लड़ाई का मैदान। फिर भी रात दिन चलकर बूढ़ी माँ
चन्द रोज़ के अन्दर ही अपने बेटे की सेना के निकट आ पहुँची।
ख़बर पाते ही हैदर अपने छोटे बेटों सहित स्वागत के लिए आगे
बढ़ा। माँ के साथ क़रीब एक हज़ार सिपाही घोड़ों और ऊँटों पर,