भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगुलबर्गा में दक्खिन के मशहूर मुसलमान सन्त हज़रत बन्दा नवाज़
गेसूदराज़ की दरगाह में रहा करता था। वली मोहम्मद के ख़र्च
के लिए दरगाह से एक छोटी सी माहवारी रक़म बँधी हुई थी।
प्राचीन भारतीय ऋषियों के समान उस समय के अनेक मुसलमान
फ़क़ीर अत्यन्त सरल, किन्तु कौटुम्बिक जीवन व्यतीत किया करते
थे। वली मोहम्मद के एक बेटा था, जिसका नाम शेख़ मोहम्मद
अली था। उसे शेख़ अली भी कहते थे। शेख़ अली अपने बाप के
समान पहुँचा हुआ फ़क़ीर माना जाता था। वह कुछ दिन बीजापुर
में रहा, फिर कर्नाटक के कोलार स्थान में आकर ठहरा। कोलार
का हाकिम शाह मोहम्मद दक्खिनी शेख़ अली का बड़ा भक्त था।
शेख़ अली के चार बेटे थे। ख़र्च की तङ्गी के सबब बेटों ने बाप से
प्रार्थना की कि हमें इजाज़त दीजिये कि हम कहीं और जाकर
नौकरी कर लें, धन और इज़्ज़त हासिल करें। किन्तु शेख़ अली ने
बेटों को समझाया :-
"हमारे बाप दादा ख़ुदातरस और परहेज़गार लोग थे। वे इस क़ाबिल
थे कि दुनिया में नाम हासिल करते, फिर भी दुनिया के बन्धनों और उसके
संसर्ग से वे अपने को सदा अलग रखने की कोशिश करते रहे; क्योंकि
दुनिया की लालसा से रूहानी शान्ति जाती रहती है और सच्चे सुख की
खोज का शौक़ मिट जाता है; इसलिए तुम्हें उचित है कि अपने पूर्वजों
के क़दम ब क़दम चलो और इस चन्दरोज़ा हस्ती के फन्दों में न आओ
× × × इसके अलावा मनस्वी और आज़ाद तबीयत के लोग अपनी
सांसारिक हाजत के तङ्ग होने से कभी दुखी नहीं होते और यदि उनके