भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 490, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें२३० भारत में अंगरेज़ी राज
सच यह है कि क्लाइव के जीवन का कोई भी काम ऐसा न था
जिससे भारतवासी उसे कृतज्ञता के साथ याद कर सकें।
उसका व्यक्तिगत चरित्र भी अत्यन्त पतित था। कैरेकोली ने
क्लाइव का अपनी 'क्लाइव की जीवनी' में उसके पापमय
व्यक्तिगत चरित्र कृत्यों की अनेक मिसालें दी हैं, जिन्हें इस पुस्तक
में उद्धृत करना व्यर्थ और शिष्टता के विरुद्ध
होगा। कैरेकोली ने लिखा है:—
“बंगाल भर में यूरोपियन और हिन्दोस्तानी दोनों तरह की स्त्रियों की
ऐसी अनेक मिसालें थीं, जिन्होंने नफ़रत के साथ उसके प्रेम प्रदर्शन को
अस्वीकार किया और उसे संसार के सामने हास्यास्पद बना दिया।”*
इनमें से अनेक स्त्रियाँ विवाहित थीं।
सन् १७६७ में क्लाइव ने सदा के लिए भारत छोड़ा और
इंगलिस्तान में एक भारतीय 'नवाब' के ठाट से रहना शुरू कर
दिया। अन्त में उसने आत्महत्या कर ली। इंगलिस्तान के अनेक
सरल-विश्वासी लोगों ने उसकी आत्महत्या का सबब यह बतलाया
कि अमींचन्द के साथ जालसाज़ी करके ब्रिटिश राज क़ायम करने,
सिराजुद्दौला और नजमुद्दौला की हत्याएँ कराने और अपने अनेक
ईसाई मित्रों की पत्नियों को बहकाकर उनके घरों का सुख नाश
करने, इत्यादि पापों की याद ने क्लाइव की आत्मा को चैन से रहने
न दिया।
- "There were several instances of both white and black women in
Bengal who rejected his offer with disdain and exposed him to the ridicule
of the world." - Life of Clive, by Caraccioli, vol. i.