भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमीर जाफ़र की मृत्यु के बाद २३१
क्लाइव के बाद वेरेल्स्ट बंगाल का गवरनर नियुक्त हुआ ।
[पार्श्व-शीर्षक: क्लाइव के] वेरेल्स्ट के एक ख़त से मालूम होता है कि सम्राट
[पार्श्व-शीर्षक: बाद] शाहआलम को दिल्ली जाने से रोकने और उसे
इतनी देर तक इलाहाबाद में ठहराए रखने में
अंगरेज़ों का काफ़ी हाथ था। वेरेल्स्ट कम्पनी के हित में सम्राट को
बंगाल लाना चाहता था, किन्तु वह चाहता यह था कि कोई ऐसी
तरकीब की जावे, जिससे अंगरेज़ों को उसे बंगाल बुलाना न पड़े,
बल्कि शाहआलम स्वयं उनके साथ बंगाल चलने की इच्छा प्रकट
करे। अगस्त सन् १७६६ में वेरेल्स्ट की जगह कारटियर गवरनर
नियुक्त हुआ। स्कॉलफ़ील्ड इस अंगरेज़ गवरनर के विषय में
लिखता है:—
“इस जिल्द के अधिकांश पत्र या तो बंगाल फ़ोर्ट विलियम क़िले के
गवरनर के नाम भेजे गए थे या उसकी ओर से दूसरों को भेजे गए थे;
किन्तु इन सब चालों और चालों के जवाब में चालों, साज़िशों और आशं-
काओं के जंजाल में से इस गवरनर का व्यक्तित्व कुछ बहुत चमकता हुआ
नज़र नहीं आता ।”*
उस समय के अंगरेज़ गवरनरों के मुख्य कार्य का यह ख़ासा
सार है। सन् १७७२ में कारटियर की जगह वारन् हेस्टिंग्स गवरनर
- "From the tangle of plot and counterplot, of intrigue and suspicion,
the personality of the Governor of Fort William in Bengal, to whom most of
the letters in this volume are addressed or in whose name they were issued,
does not emerge with any great distinctness."-A. F. Scholfield, in the
preface to the Third Volume of Calendar of Persian Correspondence.