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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 473

छठा अध्याय
मीर जाफ़र की मृत्यु के बाद
मीर जाफ़र के बड़े बेटे मीरन की हत्या का हाल ऊपर आ चुका
[हाशिया: नवाब नजमुद्दौला] है। मीर जाफ़र का दूसरा बेटा नजमुद्दौला अब
[हाशिया: और उसके साथ] मुर्शिदाबाद की मसनद पर बैठा, किन्तु असम्भव
[हाशिया: नई सन्धि] था कि अंगरेज़ हर ऐसे अवसर से पूरा लाभ न
उठाते। कलकत्ते का अंगरेज़ गवर्नर उन दिनों
“बंगाल में फ़ोर्ट विलियम क़िले का गवर्नर” कहलाता था।
अंगरेज़ ‘गवर्नर और कौन्सिल’ के पास मुर्शिदाबाद की सरकारी
सेना से कहीं अधिक सेना थी। बिना इस ‘गवर्नर और
कौन्सिल’ की रज़ामन्दी के मुर्शिदाबाद का कोई सूबेदार अब अपने
आप को क्रियात्मक सूबेदार न समझ सकता था। उस समय
के गवर्नर स्पेन्सर ने जो बन्सीटार्ट का उत्तराधिकारी था और
उसकी अंगरेज़ कौन्सिल ने नजमुद्दौला को उस समय तक