भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 472, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें२१६ भारत में अंगरेज़ी राज
कर दिया। उसकी ज़िन्दगी के आख़िरी दिनों को उन्होंने अत्यन्त
दुखमय बना दिया। अक्तूबर सन् १७६४ में उससे पाँच लाख रुपए
माहवार कम्पनी को देने का वादा करा लिया, जिससे वह अन्त
तक बहुत तङ्ग रहा और सदा शिकायत करता रहा। सन्धि से
बाहर नित्य नई और बढ़ बढ़ कर माँगें उससे की जाती रहीं।
आए दिन की इन ज़बरदस्तियों ने उसके स्वास्थ्य और आयु
दोनों पर असर डाला। प्रसिद्ध इतिहास लेखक सर विलियम
हण्टर लिखता है :—
"मीर जाफ़र जनवरी सन् १७६५ में मरा और कहा जाता है कि जिस
बेजा तरीक़े से कलकत्ते के अंगरेज़ों ने अपने व्यक्तिगत नुक़सानों के हरजाने
की अदायगी के लिए उससे तक़ाज़े शुरू किए, उनसे उसकी मौत और
जल्दी हुई।"*
वास्तव में मीर जाफ़र की मृत्यु फ़रवरी सन् १७६५ के आरम्भ
में मुर्शिदाबाद के महल में हुई। उसकी आयु उस समय ६५ वर्ष
की थी। अन्त समय में मीर जाफ़र की इच्छा के अनुसार उसके
अनेक सम्बन्धियों और बेटों के रहते हुए उसके चिर मित्र महाराजा
नन्दकुमार ने एक हिन्दू मन्दिर से गंगाजल लाकर मीर जाफ़र के
मुंह में डाला और उसी जल से अपने हाथों से उसने मीर जाफ़र
को आख़िरी स्नान कराया।
- "His death took place in January 1765, and is said to have been
hastened by the unseemly importunity with which the English at Calcutta
pressed upon him their private claims to restitution."—Sir W. W. Hunter,
in Statistical Account of Bengal vol. ix, p. 191.