भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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किए जायँ । इस पर भी शुजाउद्दौला और अंगरेज़ों में इस समय
सुलह न हो सकी।
मालूम होता है कि सम्राट बक्सर से इलाहाबाद की ओर चल
दिया। शुजाउद्दौला फिर से मुक़ाबला करने की तैयारी के इरादे
से पीछे हटा और अंगरेज़ शुजाउद्दौला का पीछा करने के लिए
आगे बढ़े।
मार्ग में अंगरेज़ों ने चुनार के क़िले का मोहासरा किया।
[चुनारगढ़ में] "सीअरुल-मुताख़रीन" में लिखा है कि अंगरेज़
[अंगरेज़ों की हार] सेनापति ने कम्पनी के नाम सम्राट का एक
दस्तख़ती परवाना क़िलेदार मोहम्मद बशीर ख़ाँ
के सामने पेश किया, किन्तु क़िले के भीतर की भारतीय सेना ने
इस परवाने की ख़ाक परवा न की। इस सेना ने जब यह देखा कि
हमारा क़िलेदार भी डाँवाडोल हो रहा है तो उन्होंने उसे क़िले से
बाहर निकाल कर उस सड़क पर छोड़ दिया, जो नवाब शुजाउद्दौला
के ख़ेमों की ओर जाती थी और स्वयं वीरता के साथ विदेशियों
से क़िले की रक्षा शुरू की। अंगरेज़ों ने अपनी तोपें सामने कीं।
कई दिन की गोलेबारी के बाद वे केवल क़िले की दीवार का एक
थोड़ा सा टुकड़ा गिरा पाए, किन्तु ज्योंही एक दिन अँधेरी रात में
अंगरेज़ी सेना ने इस रास्ते से क़िले के भीतर प्रवेश करना चाहा,
भीतर की भारतीय सेना ने अपनी बन्दूकों से उनमें से अधिकांश
का वहीं दीवार के ऊपर काम तमाम कर दिया। लाचार होकर
और बुरी तरह हार कर अंगरेज़ों को चुनार का मोहासरा छोड़