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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 469

फिर मीर जाफ़र २१३
इलाहाबाद का रास्ता लेना पड़ा। वास्तव में बिना रिशवत, दग़ा
या इसी तरह के दूसरे उपायों के अंगरेज़ों ने कभी कहीं किसी एक
लड़ाई में भी किसी भारतीय सेना के ऊपर विजय प्राप्त नहीं की।
इलाहाबाद के क़िले की संरक्षक सेना ने भी अंगरेज़ी सेना का
इलाहाबाद पर खासा मुक़ाबला किया। किन्तु अंगरेज़ों के
अंगरेज़ों का क़ब्ज़ा सौभाग्य से वही नजफ़ ख़ाँ जिसने ऊदवानाला
पर अंगरेज़ों को बुरी तरह दिक़ किया था और
जो बहुत अरसे तक इलाहाबाद के क़िले में रह चुका था और
उसके रहस्यों से परिचित था, इस मौक़े पर अंगरेज़ों से मिल
गया। क़िले की दीवारों को गिराने के लिए अंगरेज़ी सेना के पास
इस समय जो एक सबसे अच्छी तोप थी वह हिन्दोस्तान ही की
बनी हुई थी और शुजाउद्दौला के ख़ेमों की लूट में उन्हें मिली थी।
नजफ़ ख़ाँ ने अंगरेज़ों को क़िले के सब गुप्त रास्ते बतला दिए और
इस तोप ने भी उन्हें ख़ासी मदद दी। अन्त में थोड़ी सी लड़ाई
के बाद अंगरेज़ी सेना ने इलाहाबाद के क़िले में प्रवेश किया।
क़िले पर हमला करने और भीतर वालों से शर्तें तय करने में
महाराजा शिताबराय की फ़ौज आगे थी, किन्तु क़ब्ज़ा करते समय
कम्पनी की अपनी सेना आगे थी।
शुजाउद्दौला अब भाग कर बरेली पहुँचा। वहाँ से लौट कर
कम्पनी और नवाब मलहरराव होलकर की कुछ मराठा सेना की
शुजाउद्दौला में सहायता से उसने कड़ा में अंगरेज़ी सेना पर
संधि फिर हमला किया। एक दो छोटी मोटी लड़ाइयाँ