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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 465

फिर मीर जाफ़र २०६
दिया और मीर जाफ़र को पटने से कलकत्ते बुलवा लिया। कठ-
पुतली तथा बेबस मीर जाफ़र को अंगरेज़ों की आज्ञा माननी पड़ी।
मेजर कारनक की जगह मेजर मनरो अब पटने की सेना का
[हाशिया: मनरो का रोहतास के क़िले पर क़ब्ज़ा] प्रधान सेनापति नियुक्त हुआ। जुलाई मास में
वह पटने पहुँचा। अंगरेज़ों को डर था कि यदि
लड़ाई देर तक चली तो सम्भव है मराठों और
अफ़ग़ानों की सेनाएँ शुजाउद्दौला की मदद के लिए आ जावें।
इसलिए मेजर मनरो को आज्ञा दी गई कि तुम शुजाउद्दौला की
सेना पर हमला करके लड़ाई का शीघ्र अन्त कर डालो। मालूम
होता है मेजर मनरो के आते ही कम्पनी के कुछ हिन्दोस्तानी
सिपाही मीर जाफ़र के साथ अंगरेज़ों के इस अन्याय को देखकर
या किसी दूसरी वजह से अंगरेज़ों के ख़िलाफ़ बग़ावत कर बैठे।
मेजर मनरो ने फ़ौरन बिना किसी तहक़ीक़ात या पूछ ताछ के तमाम
बाग़ियों को तोप के मुंह से उड़वा दिया।
इसके बाद मेजर मनरो ने रोहिताश्व (रोहतास) के क़िले
पर क़ब्ज़ा किया। इस क़िले के विषय में, सय्यद ग़ुलामहुसेन
लिखता है कि मेजर मनरो ने आते ही डॉक्टर फुलरटन की मारफ़त
सय्यद ग़ुलामहुसेन को पत्र लिखा कि—"यदि आप रोहिताश्व
का क़िला अंगरेज़ों के हवाले करने की तदबीर कर सकें तो आप
अंगरेज़ों की मित्रता और कृतज्ञता के हक़दार होंगे।" सय्यद
ग़ुलामहुसेन लिखता है कि—"इस सूचना के मिलने पर मैंने राजा
साहूमल से बातचीत की।" राजा साहूमल रोहिताश्व के क़िले का
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