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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 347

सिराजुद्दौला ६७
की ख़बर सुनकर और कोई चारा न देख २४ जून की आधी रात
को सिराजुद्दौला केवल अपने तीन अनुचरों सहित महल की
एक खिड़की से होकर फ़क़ीर के वेष में भगवान गोला नामक नगर
की ओर निकल गया।
२५ जून को सबेरे मीर जाफ़र मुर्शिदाबाद पहुँचा, उसके पीछे
पीछे २६ को क्लाइव अपनी सेना सहित मुर्शिदाबाद आया। किन्तु
तीन दिन तक क्लाइव मुर्शिदाबाद से लगभग छै मील बाहर
सय्यदाबाद की फ्रांसीसी कोठी में ठहरा रहा। उसके अपने पत्र
से ज़ाहिर है कि वह इस समय एकाएक मुर्शिदाबाद के शहर में
प्रवेश करने से डरता था।
२६ ता० को मीर जाफ़र से समय निश्चित करके २०० गोरे
और ५०० हिन्दोस्तानी सिपाहियों सहित विजयी क्लाइव ने मुर्शिदा-
बाद के शहर में प्रवेश किया। कुछ दिनों बाद क्लाइव ने पार्लिमेण्ट
की कमेटी के सामने गवाही देते हुए कहा :—
"नगर के लोग, जो उस अवसर पर तमाशा देख रहे थे, कई लाख
अवश्य रहे होंगे; और यदि वे चाहते तो लकड़ियों और पत्थरों से हम
यूरोपियन लोगों को वहीं ख़तम कर सकते थे।"*
यह अनुमान करना अब निरर्थक है कि यदि मुर्शिदाबाद के
बाशिन्दे उस समय ऐसा कर बैठते तो भारत के बाद के इतिहास

  • "That the inhabitants, who were spectators upon that occasion,
    must have amounted to some hundred thousands ; and if they had an inclina-
    tion to have destroyed the Europeans, they might have done it with sticks
    and stones."—Clive's Evidence Before the Parliamentary Committee.
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