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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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६८ भारत में अंग्रेज़ी राज
ने किस ओर पलटा खाया होता। इसमें सन्देह नहीं कि उस समय
क्लाइव ने नवाब मीर जाफ़र के एक पक्ष-समर्थक की हैसियत से
मुर्शिदाबाद में प्रवेश किया। बहुत सम्भव है कि यदि नगर निवासियों
को उस समय क्लाइव के वास्तविक रूप का पता होता, यदि
उन्हें मालूम होता कि क्लाइव और उसके साथी इन चालों से अन्दर
ही अन्दर भारत की आज़ादी छीनने की कोशिशें कर रहे हैं, तो
बहुत सम्भव है नगर निवासियों का व्यवहार क्लाइव के साथ कुछ
दूसरा ही होता। किन्तु अभी तो विश्वासघातक मीर जाफ़र की
आँखें खुलने में भी कुछ समय बाक़ी था।
मुर्शिदाबाद की उस समय की अवस्था के विषय में क्लाइव
लिखता है :—
मुर्शिदाबाद उस “मुर्शिदाबाद का शहर उतना ही लम्बा, चौड़ा,
समय और आज आबाद और धनवान है जितना कि लंदन शहर ; फ़र्क़
इतना है कि लंदन के धनाढ्य से धनाढ्य मनुष्य के पास जितनी सम्पत्ति हो
सकती है, उससे बेइन्तहा ज़्यादा सम्पत्ति मुर्शिदाबाद में अनेकों के पास
मौजूद है।”
आज मुर्शिदाबाद भागीरथी नदी के तट पर ३५००० मनुष्यों की
एक छोटी सी बस्ती है, जिसकी आबादी प्रति वर्ष घटती जा रही है
और जिसमें यात्रियों के देखने के लिए पुराने महलों के खंडहर और
कुछ क़बरें मौजूद हैं। उद्योग धन्धों में वहाँ पर रेशमी वस्त्रों की बुनाई,
हाथी दाँत का काम और कपड़े पर सोने चाँदी के काम अभी तक
प्रसिद्ध हैं, किन्तु अब असें से ये सब धन्धे भी मृतप्राय हो रहे हैं।