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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 346

६६ भारत में अंगरेजी राज
उसकी छाती पर सवार था। सम्भव है क्लाइव की ओर से भी
मीर जाफ़र के दिल में दग़ा का डर रहा हो। क्लाइव के सामने
पहुँचते ही ठीक उस समय जब कि गारद उसकी पेशवाई के लिए
आगे बढ़ी, मीर जाफ़र घबराकर चौंक पड़ा। उसका चेहरा एक
दम स्याह पड़ गया। क्लाइव ने फ़ौरन उसे गले लगाकर 'तीनों
प्रान्तों का सूबा' कह कर सलाम किया। मीर जाफ़र सँभला।
क्लाइव ने उसे विश्वास दिलाया कि अंगरेज़ धर्म्म समझ कर अपने
वादों को पूरा करेंगे। इसके बाद क्लाइव ने उसे सिराजुद्दौला का
पीछा करने की सलाह दी। फ़ौरन वहाँ से कूच कर २५ तारीख़
को सबेरे मीर जाफ़र मुर्शिदाबाद पहुँचा।
एक दिन पहले यानी २४ को सबेरे सिराजुद्दौला मुर्शिदाबाद
[सिराजुद्दौला फ़क़ीरी] पहुँचा चुका था। सिराजुद्दौला का ख़ज़ाना
[भेष में] लबालब भरा हुआ था। धन को पानी की तरह
बहाकर उसने फिर एक बार फ़ौज खड़ी करने
और अपनी क़िस्मत आज़माने का प्रयत्न किया। किन्तु प्लासी
की पराजय की ख़बर सारे देश में बिजली की तरह फैल चुकी थी।
सिराजुद्दौला के इक़बाल का सूर्य्य अब अस्त हो रहा था और अस्त
होने वाले सूर्य्य की पूजा कोई नहीं करता। सिराजुद्दौला ने देख लिया
कि अब कोई मेरा साथ देने के लिए तैयार नहीं है। उसके कुछ
दरबारियों ने उसे सलाह दी कि आप हार मानकर विदेशियों के
साथ सन्धि कर लें, किन्तु उस वीर ने अत्यन्त तिरस्कार के साथ
इस सलाह को ठुकरा दिया। अंत में देशद्रोही मीर जाफ़र के आने