भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलेखक की कठिनाइयां ५
दिख जावे। अंगरेज़ों के लिखे हुए भारतीय इतिहास क़रीब क़रीब शुरू से
आख़ीर तक इसी दोष से रंगे होते हैं। वास्तव में शायद संसार के किसी
भी देश का इतिहास इस क़ुदरती दोष द्वारा इतना अधिक विकृत नहीं किया
गया जितना हिन्दोस्तान का। हिन्दोस्तान और इङ्गलिस्तान का सम्बन्ध ही
इस तरह का है कि इस सम्बन्ध के एक बार शुरू हो जाने के बाद निष्पक्ष
भारतीय इतिहास का लिखा जाना क़रीब क़रीब नामुमकिन हो गया। एक
ओर अंगरेज़ लेखकों की साम्राज्य प्रिय दृष्टि और दूसरी ओर अंगरेज़ी काल
के ज़्याद़ातर भारतीय लेखकों की विदेशी शिक्षा, मानसिक दासता और
आजीविका की विकट परिस्थिति। नतीजा यह है कि भारतीय इतिहास की
जो पुस्तकें आजकल हमें मिलती हैं, उनमें से अधिकांश में निरर्थक तुच्छ
बातों पर ज़ोर दिया जाता है और इतिहास के महत्वपूर्ण पहलुओं की
अवहेलना की जाती है, उन्हें दबाया जाता है, ऐतिहासिक घटनाओं के
सिलसिले के सिलसिले ग़लत बयान किए जाते हैं और अनेक व्यक्तियों के
चरित्र को सफ़ेद की जगह काला और काले की जगह सफ़ेद रंग कर हमारे
सामने पेश किया जाता है, अनेक सच्ची घटनाओं का इतिहास में पता तक नहीं
चलता और अनेक कल्पित घटनाएँ सच्ची कह कर बयान की जाती हैं। इसी
लिए इक्का दुक्का बिरले अपवादों को छोड़कर हिन्दोस्तानियों और ख़ास कर सर-
कारी विश्वविद्यालयों के हिन्दोस्तानी प्रोफ़ेसरों के लिखे इतिहास इस विषय
में और भी अधिक दूषित और लज्जास्पद दिखाई देते हैं। यह सब हिन्दोस्तान
की इस समय की ख़िलाफ़ क़ुदरत परिस्थिति का क़ुदरती नतीजा है।
इन सब विचारों के समर्थन में हम केवल थोड़े से यूरोपीय विद्वानों की
सम्मति नक़ल करते हैं।