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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 30, कुल 727 में से

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पृष्ठ 30

४ पुस्तक प्रवेश

नाम तक नहीं मिलता। यही वजह है कि भारत के प्राचीन साहित्य से
तिथियों का ठीक ठीक पता नहीं चलता। इसी बात में मामूली इतिहास के
ऊपर रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थों की श्रेष्ठता और कहीं बढ़ कर
उपयोगिता है।
इतिहास लेखक की कठिनाइयाँ
जो कठिनाइयाँ मनुष्य को अपने समय का इतिहास लिखने में होती
हैं उससे ज़्यादा कठिनाइयाँ पुराने समय के इतिहास के लिखने में होती
हैं। पिछले समय का इतिहास लिखने वाले को भी इन्हीं पक्षपात से रँगे हुए
उल्लेखों के आधार पर अपनी रचना करनी पड़ती है। काल और वस्तुस्थिति
की दूरी के कारण उसे और भी अधिक अँधेरे में टटोलना पड़ता है। भारत
का और ख़ास कर अंगरेज़ी काल के भारत का इतिहास लिखने वाले के
लिए ये कठिनाइयाँ कई गुनी अधिक बढ़ जाती हैं। ब्रिटिश भारत का
इतिहास लिखने वाले को अधिकतर अंगरेज़ों के लिखे ग्रन्थों का सहारा
लेना पड़ता है। भारतवासियों के हाथ का लिखा कोई सिलसिलेवार
इतिहास इस समय का नहीं मिलता। जो अधूरे वृत्तान्त किसी किसी
भारतवासी के हाथ के लिखे मिलते हैं, उनमें से भी अनेक के लेखक
अंगरेज़ों के धनक्रीत थे, यह बात उन्हीं के लेखों से साबित है।
संसार के इतिहास में जब जब और जहाँ जहाँ एक क़ौम दूसरी क़ौम
के शासन में आई है, वहाँ वहाँ क़ुदरती तौर पर शासक क़ौम के लेखकों की
ग़रज़ अपनी रचनाओं द्वारा यही रही है कि अपनी क़ौम के लोगों में देश-
भक्ति, आत्मविस्वास, स्वाभिमान और साहस को जाग्रत किया जावे और
शासित क़ौम वालों में इन्हीं गुणों को कम किया जावे या पैदा न होने