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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 266

२० भारत में अंगरेज़ी राज
पास अपने इस कथन के लिये काफ़ी अच्छे प्रमाण थे। उस समय के तमाम
उल्लेखों की पूरी तरह छान बीन करने के बाद सर हेनरी यूल के दिल
पर यह असर पड़ा कि बंगाल की खाड़ी के अंदर कम्पनी के मुलाज़िमों की
नैतिक और सामाजिक अवस्था 'निस्सन्देह भयंकर' थी।'*
थोड़े ही दिनों में ख़ास कर बम्बई के अन्दर अंगरेज़ सौदागरों के
अत्याचार इतने बढ़ गए कि उनकी शिकायत
[पार्श्व-शीर्षक: औरंगज़ेब और] औरंगज़ेब के कानों तक पहुँची । फ़ौरन
[पार्श्व-शीर्षक: अंगरेज़] औरंगज़ेब ने हुकुम जारी कर दिया कि इन
लोगों की कोठियाँ ज़ब्त कर ली जायँ और इन्हें मार कर हिन्दो-
स्तान से बाहर निकाल दिया जाय। सूरत, विशाखपट्टन आदि
कई स्थानों की अंगरेज़ी कोठियाँ ज़ब्त कर ली गईं और वहाँ से
अंगरेज़ों को निकालकर बाहर कर दिया गया। बम्बई को घेर
लिया गया। किन्तु ये लोग काफ़ी चालाक थे, वे फ़ौरन औरंगज़ेब
के क़दमों पर गिर पड़े। उन्होंने कान पकड़ कर अपनी पिछली
ख़ताओं के लिये माफ़ी चाही। आइन्दा के लिये नेक चलनी का
वादा किया और मुग़ल सम्राट से जांबख़्शी की प्रार्थना की।†

  • "The English in Bengal were equally notorious for their quarrels. . . .
    The old Viceroy, Shayista Khan, called them 'a company of base, quarrelling
    people and foul dealers,' and our great modern authority will not gainsay that
    the noble had good grounds for his assertion. The impression of the moral
    and social tone of the Company's servants in the Bay which has been left on
    the mind of Sir Henry Yule by his exhaustive study of the records of the time is
    'certainly a dismal one'"—Dr. C. R Wilson's Early Annals of the English
    in Bengal, vol. i. p. 66.
    † "Stooped to the most abject submission"—Mill, book i, chap v.